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जयपुर के मेजर भानुप्रताप शहीद

जम्मू/जयपुर. bh एलओसी के समीप आतंकवादियों से मुठभेड़ में जयपुर का सपूत मेजर भानुप्रताप सिंह राठौड़ शहीद हो गया। मेजर भानुप्रताप जयपुर के श्याम नगर निवासी थे।

उनके पिता राजेंद्र सिंह राठौड़ भरतपुर में एडिशनल एसपी हैं। उन्हीं ने रविवार को भरतपुर से फोन पर भानुप्रताप के शहीद होने की सूचना अपने घरवालों को दी। जब यह सूचना आई, भानुप्रताप की बहन दीपिका भी पति के साथ श्यामनगर आई हुई थी।

मेजर की पत्नी सारिका सिंह फिलहाल ग्वालियर में हैं और वे सोमवार सुबह तक जयपुर पहुंचेंगी। मेजर का एक तीन वर्षीय बेटा रुद्रप्रताप सिंह है। मेजर भानुप्रताप इन दिनों 43 आरआर में डेपुटेशन पर थे। घटना में पुलिस का सिपाही संजीव कुमार भी शहीद हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक राजौरी जिले के थानामंडी क्षेत्र में शहादरा शरीफ के समीप आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इस पर 43 आरआर और जेएंडके पुलिस के जवानों ने शनिवार रात को इस क्षेत्र को घेर लिया। वहां जंगल में एक पुराने मकान में आतंकवादी छुपे हुए थे। जैसे ही जवानों ने मकान का दरवाजा तोड़ा, भीतर से आतंकवादियों ने जबर्दस्त फायरिंग शुरू कर दी। इसमें मेजर भानू प्रताप और संजीव कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। अभी बाकी जवान कुछ सोच पाते इससे पहले ही आतंकवादियों ने मकान के भीतर से एक ग्रेनेड फैंक दिया जिससे अफरा-तफरी मच गई।

इस हमले में तीन जवान जावेद जाफर, ज्ञान प्रकाश और रविंद्र सिंह भी गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि सुरक्षा बलों ने रात को ही इस पूरे क्षेत्र को घेर कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया था, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।

जयपुर का सपूत शहीद

bhanuजयपुर के मेजर भानुप्रताप सिंह राठौड़ जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के शहादरा गांव में आतंकवादियों का सामना करते रविवार तड़के शहीद हो गए। वे 31 वर्ष के थे। उनके तीन साल का एक पुत्र है। वे भरतपुर में एडीशनल एसपी राजेंद्रसिंह राठौड़ के इकलौते पुत्र थे। मेजर राठौड़ का पार्थिव शरीर संभवतया सोमवार दोपहर जयपुर पहुंचेगा।

जयपुर के श्याम नगर स्थित निवास पर परिजनों ने बताया कि राजौरी जिले के शहादरा गांव में 18 राजपूताना राइफल्स के मेजर राठौड़ व उनके साथी एक सूचना पर रविवार तड़के 3 से 4 बजे के बीच आतंकवादियों की खोज में निकले थे। यहां एक कच्चे घर पर शक होने पर उसका दरवाजा खोलते ही अंदर छिपे आतंकवादियों ने गोलियों की बौछार शुरू कर दी।

साथियों में सबसे आगे होने से मेजर राठौड़ को सबसे पहले आतंकियों की गोलियों का सामना करना पड़ा। राठौड़ ने उनका सामना करने का प्रयास किया, लेकिन एक गोली सिर, एक गोली पांव, एक हाथ तथा दो गोलियां सीने के आरपार निकल र्गई। राठौड़ का विवाह चार वर्ष पूर्व ही ग्वालियर की सारिका सिंह से हुआ था। उनके 3 साल के बेटे रुद्रप्रताप सिंह ने कुछ समय पूर्व ही स्कूल जाना शुरू किया है। वे मूल रूप से चूरू जिले के ल्होसना बड़ा गांव के निवासी थे।

अपने गुट्टू को याद करती रही मां : मां पद्मा कंवर घर की अन्य महिलाओं के साथ अंदर के कमरे में थीं। वह रुंधे गले से अपने गुट्टू (शहीद मेजर) को याद करती रहीं। बोलीं- त्नगुट्टू बहुत चुलबुला था। सबकी मदद करता था। किसी काम में पीछे नहीं रहता था। इसलिए हर मोर्चे पर सबसे आगे रहता था। मन में डर भी रहता तो सीना फूलता भी था कि हमारा सपूत हर काम में सबसे आगे है।त्न बचपन से गुट्टू को गोद में खिलाने वाले मामा समरथ सिंह ने कहा, 5 दिन पहले ही फोन पर बात हुई थी गुट्टू से। पूछ रहा था, मां कैसी हैं, पुरी की यात्रा कैसी चल रही है मां की। उनका ख्याल रखना।

गंगानगर स्थानांतरण हो गया था : मेजर भानुप्रताप सिंह मूल रूप से 8 राज राइफल्स में थे। फिलहाल दो साल से 43 राष्ट्रीय राइफल्स में प्रतिनियुक्ति पर थे। मेजर का तबादला 5-6 दिन पूर्व ही गंगानगर के लालगढ़ जटान में अपनी ही यूनिट में हो गया था। वे रिलीव भी हो गए और नए अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। दो-तीन दिन इसलिए रुके कि नए अधिकारी को कार्यभार सौंपना था। रिलीव होने के बावजूद वे रविवार तड़के अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आतंकवादियों से लोहा लेने निकल पड़े।

पिता ने किया सलाम : मेजर राठौड़ के शहीद होने की सूचना सबसे पहले उनके पिता भरतपुर में एडीशनल एसपी राजेंद्र सिंह राठौड़ को मिली। उन्होंने देश के लिए काम आए जवान पुत्र को सलाम किया और गम का गुबार नम आंखों से झरने लगा। भरतपुर से ही फोन पर उन्होंने मेजर राठौड़ की मां पद्मा कंवर को पुत्र के शहीद होने की सूचना दी।

जैसे ही जयपुर के श्याम नगर की सुरेंद्र पाल कॉलोनी (संजीवनी हॉस्पिटल के पीछे) स्थित उनके निवास पर यह सूचना मिली, घर का माहौल गमगीन हो गया। मां की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी तो बहन दीपिका बिलख पड़ी। दीपिका कुछ दिन रहने के लिए अनायास ही सुबह पति लोकांशुमान सिंह व पुत्र के साथ यहां आई थी। लोकांशुमान सिंह ने बताया कि मैं पत्नी व बच्चे को यहां कुछ दिन के लिए छोड़ने दिल्ली से आया था। यहां पहुंचने पर सुबह करीब 8:30 बजे मेजर साहब के बारे में यह सूचना मिली।

खुशमिजाज और दिलेर : शहीद की बुआ के पुत्र अक्षय सिंह ने बताया कि मामाजी की हनुमानगढ़ में डीएसपी के रूप में पोस्टिंग के दौरान भानुप्रताप आठवीं कक्षा में नेशनल पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। मैं भी उसी स्कूल में प्राइमरी कक्षा में था। शुरू से ही उन्हें खुशमिजाज देखता था। वे बहुत हिम्मत वाले थे। बहन दीपिका के पति लोकांशुमान सिंह ने बताया कि दो दिन पहले ही बच्चों के बारे में उनसे फोन पर बात हुई थी कि बेटा रुद्र स्कूल जाने लगा है। मौसी के लड़के धनेशप्रताप सिंह ने बताया कि मेजर बड़े सिंपल और दिलेर थे। कोई भी समस्या या परेशानी को तुरंत निबटाने में विश्वास रखते थे।

पढ़ाई में अव्वल : पढ़ाई की शुरुआत बापूनगर स्थित सेंट पीटर्स स्कूल से हुई। हनुमानगढ़ के नेशनल पब्लिक स्कूल के बाद बिट्स पिलानी से स्कूलिंग पूरी की और जयपुर के महाराजा कॉलेज से बीएससी की। शुरू से ही पढ़ाई में आगे रहने वाले राठौड़ का 3 बार आर्मी में सलेक्शन हो गया, लेकिन 2 बार मां ने नहीं जाने दिया। तीसरी बार आखिर अपनी मंजिल पर कदम बढ़ा ही दिया। सर्विस रिकॉर्ड अच्छा होने के कारण तुरंत प्रमोशन भी होता रहा। सैकंड लेफ्टिनेंट से जॉइन कर पहले कैप्टन फिर मेजर बने।

दोपहर बाद जयपुर पहुंचे पिता : भरतपुर में कार्यरत पिता राजेंद्रसिंह राठौड़ दोपहर बाद श्याम नगर जयपुर स्थित अपने निवास पर पहुंचे। देखते ही देखते रिश्तेदारों, जान-पहचान वालों तथा आसपड़ोस के लोगों का जुटना शुरू हो गया। घर पहुंचने के बाद राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पिता किसी से बात करने की स्थिति में भी नहीं थे।





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GOVIND SHARMA
Monday, 21st Jul 2008, 21:12
We are proud of you major, you are very very brave & its give indication to militants & enemy that we are not frighteen to accept bullet on front & we will also be able to destroyed hole militants with from root. Jai Hind Bharat Mata ki Jai,