बीकानेर.
नगर परिषद ने एक बार फिर से डेयरियों को शहर से बाहर निकालने की मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत तेलीवाड़ा चौक में डेयरी चलाने वाले लोगों को नोटिस जारी किए हैं। नगर परिषद ने इस तरह का एक अभियान पहले भी शुरू किया था लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाया। एक बार फिर से शुरू हुए इस अभियान के तहत डेयरियों को तुरंत बंद करने के लिए कहा गया है।
अगर ऐसा नहीं किया गया तो तीन दिन में कार्रवाई की जाएगी। शहर में आवारा पशुओं के अलावा पालतू मवेशियों की समस्या भी बड़ी है। शहर के रिहायशी इलाकों में मवेशियों के बाड़े बने होने की वजह से रहने वालों को तो परेशानी होती है। इसके अलावा इन मवेशियों को दिन के समय बाड़े से बाहर निकाल दिया जाता है। इधर-उधर घूमते-चरते ये मवेशी शहर की व्यस्ततम रहने वाली सड़कों पर आ जाते हैं जिससे यातायात भी प्रभावित होता है।
तेलीवाड़ा मोहल्ला, नत्थूसर गेट, डागा पिरोल, मोहता चौक, गोगागेट आदि क्षेत्रों में इस तरह पालतू पशुओं को कभी भी घूमते देखा जा सकता है। तेलीवाड़ा मोहल्ले में तो पशुओं के चरने के लिए घास आदि यहां बने पानी के स्टैंड के पास ही डाली जाती रही है। गोगागेट का एक गेट हमेशा पशुओं से भरा रहता है।
शहर के कई मंदिरों के पास भी इस तरह के पशु विचरते रहते हैं जहां श्रद्धालु पुण्य कमाने के लिए हरे पत्ते की सब्जियां डालते हैं। इन स्थानों पर पशुओं के रहने के कारण आवागमन प्रभावित होता है और कई बार ये पशु भी लोगों को चोटिल कर देते हैं। इन पशुओं की वजह से शहर की सड़कों पर गंदगी भी रहती है। इस तरह की शिकायतों के बाद एक बार फिर से नगर परिषद ने कार्रवाई शुरू की है।
प्रारंभिक रूप से तेलीवाड़ा क्षेत्र में रहने वाले सात लोगों को नोटिस जारी करते हुए परिषद आयुक्त ने कहा कि है कि सड़कों पर पालतू पशुओं को छोड़ना और शहर के बीच में डेयरी का संचालन राजस्थान म्यूनिसिपल एक्ट 1959 की धारा 229, 235, 248 का उल्लंघन है। अगर तीन दिन में इसे बंद नहीं किया गया तो सक्षम न्यायालय में कार्रवाई की जाएगी।
नई नहीं है समस्या
आवारा पशुओं के अलावा पालतू पशुओं की समस्या भी शहर के लिए नई नहीं है। सुबह दूध दूहने के बाद लोग अपने बाड़ों को खाली कर देते हैं। यह पुराने समय की व्यवस्था है जब पशुओं को गोचर में चरने के लिए छोड़ दिया जाता था। समय के साथ यह व्यवस्था बदल गई और अब डेयरियां शहर के बीच में आ चुकी हैं। पिछले दिनों नगर परिषद की ओर से सर्वे करवाया गया जिसमें करीबन एक हजार डेयरियां दर्ज हुई। इन्हें शहर से बाहर भेजने का फरमान जब जारी किया गया तो डेयरी वालों ने जमीन की मांग की। जमीन नगर परिषद के पास नहीं थी।
इसलिए न्यास से जमीन मांगी गई। न्यास ने भी इस संबंध में हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद एक बार फिर प्रक्रिया रुक गई लेकिन नए सिरे से यह कार्रवाई फिर से शुरू हुई है। परिषद सूत्रों का कहना है कि अगर नोटिस के बाद भी डेयरी को नहीं हटाया गया तो परिषद के पास अधिकार है कि पशुओं को जब्त भी कर ले। हालांकि परिषद इसके लिए कानून-सम्मत रास्ता अपनाते हुए कार्रवाई करेगी। इस कार्रवाई के लिए पहले नोटिस जारी कर रही है।