जोधपुर. नगर विकास न्यास की खस्ता माली हालत को छिपाने की तमाम कोशिशों और आय बढ़ाने के झूठे दावों की पोल खुल गई है। अपनी विफलता छिपाने के लिए न्यास बोर्ड ने अब साठ करोड़ रुपए का कर्ज लेने का मानस बनाया है। इसके लिए रविवार को आनन-फानन में एक परिचलन प्रस्ताव बनाया गया, जिसमें विकास कार्ये को पूर्ण करने की दलील पर यह कर्ज लेने के लिए सरकार की मंजूरी चाही गई है।
भास्कर ने रविवार के अंक में त्नन्यास कंगाली के कगार परत्न शीर्षक से प्रकाशित खबर में यह खुलासा किया था कि जनता को ख्वाब बेचते-बेचते न्यास का मौजूदा बोर्ड खजाना खाली कर चुका है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में उसे करीब डेढ़ सौ करोड़ की देनदारियों का सामना करना पड़ेगा।
न्यास अध्यक्ष राजेन्द्र गहलोत शनिवार तक तो यह दावा कर रहे थे कि उनके पास खजाना भरने की खूब योजनाएं हैं और इसके लिए किसी को टेंशन लेने की जरूरत नहीं, लेकिन रविवार को उनकी टेंशन जगजाहिर हो गई। अध्यक्ष गहलोत ने अफसरों से विचार-विमर्श के बाद तय किया कि अधूरे काम पूरे करने के लिए कर्ज लेना ही एकमात्र रास्ता है।
यह कर्ज लेने के लिए एक परिचलन प्रस्ताव बनाया गया है, जिसके लिए न्यास का दफ्तर छुट्टी के दिन भी खुला। इस परिचलन प्रस्ताव में विभिन्न विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए साठ करोड़ रुपए का कर्ज लेने के लिए राज्य सरकार की स्वीकृति मांगी गई है। इस पर हस्ताक्षर करवाने के लिए न्यासियों को टेलीफोन से बुलाया जाता रहा।
हालांकि दो-तीन न्यासियों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन इस प्रस्ताव पर सरकार की मंजूरी लेने के लिए अध्यक्ष गहलोत सोमवार को जयपुर जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर सरकार की स्वीकृति लेने के लिए कलेक्टर नरेशपाल गंगवार भी उनके साथ होंगे। हालांकि उनके जयपुर जाने की वजह हाउसिंग बोर्ड को भूमि स्थानांतरण को लेकर आहूत उच्च सतरीय बैठक बताया जा रहा है।
यूआईटी चेयरमैन से बातचीत
भास्कर: साठ करोड़ का कर्ज लेने के लिए क्या परिचलन प्रस्ताव लाया गया है?
गहलोत: हां, लाए हैं। क्यों, इसमें भी कोई आपत्ति है क्या? सरकार की मंजूरी लेकर रखना चाहते हैं। विकास योजनाओं के लिए जरूरी हुआ तो कर्ज लेंगे। आप दे सकते हो तो बताओ।
भास्कर: यह नौबत क्यों आई?
गहलोत: न्यास की योजनाएं बिना पैसे थोड़े ही चल रही हैं। आप जो चाहे लिखो।