उदयपुर. खान एवं भू-विज्ञान विभाग की ओर से वर्ष 2002 के बाद आबंटित किए गए सौ से अधिक खनन पट्टे अवैध हैं। इस बीच चार हेक्टेयर से कम खनन पट्टों को निरस्त करने की कार्रवाई भी नियम विरुद्ध की गई है क्योंकि केंद्र सरकार की ओर से 15 मई 2002 को लागू किए गए मार्बल कंजर्वेशन एंड डेवलपमेंट रूल्स 2002 की पालना नहीं की जा रही है।
विभाग के अधिकारियों को इस बारे में पता है, लेकिन वे अनजान बने हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार नए नियमों के तहत चार हेक्टेयर से कम क्षेत्र के लिए खनन पट्टे जारी नहीं किए जा सकते।
इसके बावजूद खान विभाग ने छह सालों में 100 से अधिक मार्बल खदानों का आबंटन किया है, जो चार हेक्टेयर से कम है। इन नियमों में निरस्त करने का प्रावधान नहीं होने के बावजूद खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने सौ से अधिक खनन पट्टों को निरस्त कर दिया।
नोटिफिकेशन नहीं किया गया
नियमों में संशोधन के लिए राज्यस्तरीय समिति सदस्य राजेंद्रसिंह मेहता ने बताया कि 15 मई, 02 को मार्बल कंजर्वेशन एवं डेवलपमेंट रूल्स देशभर में लागू हुए हैं। खान एवं खनिज विकास नियमावली अधिनियम (एमएमडीआर) की धारा 16 में मार्बल संरक्षण, 21 में पेनल्टी और 26 में नोटिफिकेशन का प्रावधान है। नियमों को लागू करने के लिए नोटिफिकेशन किया जाना था जो नहीं किया गया। इन नियमों के अवहेलना कर किए गए खनन पट्टों का आबंटन और निरस्त करने की कार्रवाई अवैध है।
अध्ययन कराया जाएगा
यह मामला पहली बार सामने आया है। मामले का अध्ययन कराया जाएगा। नियमों को जानकार और मौजूदा स्थिति को देखकर ही कुछ बताया जा सकता है। —सीपी व्यास, निदेशक खान एवं भू-विज्ञान विभाग
लागू नहीं हुए यह नियम
>> मार्बल कंजर्वेशन एंड डेवलपमेंट रूल्स के नियम 7 में न्यूनतम 4 और अधिकतम 50 हेक्टेयर से अधिक की लीज जारी नहीं करना।
>> लीज आबंटन में किसी भी क्षेत्र की एक भुजा कम से कम दो सौ मीटर होना।
>> लीज आबंटन व निरस्त करने वाले अधिकारी की नियुक्ति व उसके क्षेत्राधिकार का नोटिफिकेशन करना।
>> नई खदानों के लिए माइनिंग प्लान, इको फ्रेंडली माइनिंग प्लान, चालू खदानों के नवीनीकरण के लिए एक हैक्टेयर से कम क्षेत्र के लिए माइनिंग स्किल का प्रावधान लागू । सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल का गठन।