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आईसीटी प्रोजेक्ट की कवायद

चूरू. ict सरकार के निर्देशानुसार राज्य की दो हजार 293 स्कूलों में आईसीटी प्रोजेक्ट शुरू करने की कवायद होने लगी है। प्रोजेक्ट के जरिए कंपनी की ओर से राज्यभर में चयनित सैकंडरी व हायर सैकंडरी स्कूलों में 10-10 कंप्यूटरों के अलावा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी।

इसी सत्र से इन स्कूलों में बच्चों को कंप्यूटर की तकनीकी शिक्षा का लाभ मिलने लगेगा। कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के दृष्टिगत लागू होने वाली इस योजना के तहत सभी व्यवस्थाएं कंपनी की ओर से होगी।

चयनित स्कूलों के संस्था प्रधानों को केवल कंप्यूटर रूम व जनरेटर के लिए स्थान उपलब्ध करवाना होगा। यदि योजना के तहत समयबद्ध कार्य होता रहा, तो इन स्कूलों में एक अगस्त से कंप्यूटर की शिक्षा शुरू हो जाएगी। जानकारी के अनुसार कंप्यूकाम साफ्टवेयर लि. कं. के जरिए सभी सुविधाएं दी जाएंगी।

ये मिलेगी सुविधा
योजना के तहत कंपनी की ओर से चयनित स्कूलों में 10-10 कंप्यूटर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसी क्रम में एक स्केनर, एक प्रिंटर, एक प्रोजेक्टर, दो यूपीएस, एक वैब कैमरा, एक वायरलैस रुटर, एक जनरेटर व फर्नीचर की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाएगी। शिक्षण के लिए अनुदेशक भी कंपनी की ओर से नियुक्त किया जाएगा।

यह है प्रोजेक्ट
इन्फोर्मेशन एंड कंम्यूनिकेशन टैक्नोलॉजी (आईसीटी) प्रोजेक्ट कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के दृष्टिगत बनाया गया है। राज्य सरकार की इस योजना के तहत इस प्रोजेक्ट के जरिए चयनित उच्च माध्यमिक विद्यालय व माध्यमिक विद्यालय में बच्चों को कंप्यूटर की गुणवत्तापरक शिक्षा दी जाएगी।

योजना के तहत अधिकतर स्कूलों में जनरेटर उपलब्ध करवाया दिया गया है। समायावधि में अन्य सामग्री उपलब्ध करवा दी जाएगी।
- चांदमल दाधीच, अकाउंट एग्ज्यूकेटिव कंप्यूकाम साफ्टवेयर लि.

योजना के अनुसार जिले की चयनित स्कूलों में अनुदेशकों की नियुक्ति कर शीघ्र ही शिक्षण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
- कौशल दाधीच, जिला तकनीकी सहायक कंप्यूकाम साफ्टवेयर लि.

कहां कितनी स्कूलें

जिले में 88 स्कूल चयनित
योजना के तहत चूरू जिले की 88 उमावि व मावि का चयन किया गया है। झुंझुनूं जिले में 121 व सीकर जिले में 115 स्कूलों का चयन हुआ है। राज्य सरकार की इस योजना के क्रियान्वयन से स्कूलों का शैक्षणिक स्तर सुधरेगा। कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, वहीं जनरेटर की व्यवस्था से ग्रामीण स्कूलों में बिजली कटौती से परेशानी नहीं होगी।
-महेंद्रसिंह परिहार, शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी, चूरू





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