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नई दिल्ली.
लोकसभा में मंगलवार को विश्वास मत पर बहस के दौरान बसपा सांसदों द्वारा किए जा रहे हंगामे और टोका-टोकी के बीच कांग्रेस महासचिव और सांसद राहुल गांधी ने कहा कि 70 फीसदी युवाओं वाले देश भारत को अपने फैसले बिना डरे करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश के लिए ‘अज्ञात का भय’ आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनना चाहिए। राहुल ने अपने भावनात्मक भाषण में परमाणु करार के मुद्दे का जोरदार समर्थन किया और इसे आम जनता से जोड़ने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि देश से गरीबी दूर करने के लिए ऊर्जा सुरक्षा जरूरी है। करार इसी को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। राहुल ने करार के पक्ष में अपने तर्र्को को मजबूती से पेश करने के लिए महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के दो गरीब परिवारों के साथ हुए निजी अनुभव सुनाए। उन्होंने जैसे ही गरीबी के कारण शशिकला और कलावती के परिवार के साथ पेश आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया तो विपक्षी सांसदों ने जमकर टोका-टोकी की। कलावती के बारे में बताने के दौरान राहुल को कटाक्षों का सामना भी करना पड़ा।
‘भारतीय के नाते बोलूंगा’
राहुल ने अपने भाषण के प्रारंभ में कहा, ‘मैं यहां एक भारतीय होने के नाते बोलूंगा न कि कांग्रेसी होने के कारण।’ इस पर विपक्ष द्वारा टोका-टोकी करने पर उन्होंने कहा कि भले ही आप मुझसे सहमत नहीं हों लेकिन मेरी बात सुन लीजिए।
वाजपेयी की तारीफ
राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेताअटलबिहारी वाजपेयी की प्रशंसा करके भाजपा को आश्चर्य में डाल दिया। राहुल ने पहले तो देश के ऊर्जा संकट को समझने और इसके समाधान के वास्ते काम करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा की, फिर उसी अंदाज में वाजपेयी की यह कहकर तारीफ की कि उन्होंने भी इस समस्या को देखा और इसके लिए काम किया। प्रतिद्वंद्वी पार्टी ने जब इस उदार टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई तो राहुल ने भाजपा सांसदों की बेंचों की ओर देखते हुए कहा, ‘इस पर तो ताली मारिए’।
बसपा सदस्यों का हंगामा
राहुल के भाषण के दौरान खासकर बसपा सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। राहुल ने अपना बाकी भाषण लंच के बाद पूरा किया।
अपहरण का आरोप
राहुल के भाषण के समय बसपा नेता ब्रजेश पाठक खड़े होकर जोर-जोर से बोलने लगे कि उनकी पार्टी के चार साथियों का अपहरण कर लिया गया है। सदन उनकी शिकायत पर ध्यान दे। बसपा सदस्यों ने पाठक के नेतृत्व में कुछ दस्तावेज लहराते हुए सरकार के खिलाफ कई आरोप लगाए, लेकिन शोरगुल के कारण स्पष्ट रूप से कुछ भी सुनाई नहीं दिया।