नई दिल्ली.भारतीय मीडिया व एंटरटेनमेंट जगत तेजी से फल-फूल रहा है। इसमें ऐसा बूम आया है कि दुनिया के तमाम देश इसके आगे सिर झुकाने को मजबूर हैं। प्राइसवाटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) की ‘ग्लोबल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट आउटलुक रिपोर्ट २क्क्८-१२’ के अनुसार भारतीय मीडिया और मनोरंजन जगत वैश्विक औसत से भी तेजी से बढ़ रहा है।
आंकड़ों में दर्ज है तरक्की
रिपोर्ट में जहां एक ओर मीडिया और एंटरटेनमेंट जगत वैश्विक स्तर पर ६.६ फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रहा है, भारत में इसकी वृद्धि दर करीब १८.५ फीसदी आंकी जा रही है।
कंपनियों के लिए अच्छी संभावनाएं
प्राइसवाटर हाउस कूपर्स के ग्लोबल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट विभाग के मैनेजिंग पार्टनर मार्केल फेनेज ने यह रिपोर्ट जारी करते हुए इस क्षेत्र में आए बूम व इसमें भारत की अग्रणी भूमिका की बात कही। उन्होंने ये बात यूं ही नहीं कही। इसके लिए पीडब्ल्यूसी ने भारत में ४८१ अलग-अलग लोगों से बातचीत कर टीवी और इंटरनेट के प्रति इनके झुकाव के बारे में गहन जानकारियां एकत्र कीं। इस आधार पर उन कंपनियों के लिए अच्छे संकेत जारी किए गए, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विकास की बयार लाने को तैयार हैं। विकसित बाजारों की कंपनियां निवेश के लिए ब्राजील, रूस, भारत और चीन (बीआरआईसी) की ओर रुख कर सकती हैं।
महंगाई से बेपरवाह मनोरंजन
पीडब्ल्यूसी का मानना है कि दुनियाभर में जारी मुद्रास्फीति के दबाव व बढ़ती महंगाई के बावजूद मीडिया-एंटरटेनमेंट क्षेत्र तरक्की करता रहेगा। स्वर्णिम संभावनाएं (2008-12)इंटरनेट विज्ञापन (मोबाइल व वायर): ३५.३ फीसदी की दर से ३२.६क् करोड़ डॉलर का होगा घरेलू उद्योग।
टेलीविजन प्रयोग व लाइसेंस फीस : एशिया-प्रशांत में सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाला देश होगा। खर्च करीब ६.७ अरब डॉलर तक बढ़ जाएगा। उपभोक्ता/ग्राहक खर्च : वर्ष २क्क्७ में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ९.७ फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसका २७.४ फीसदी श्रेय कैसिनो आधारित खेलों को व २६ फीसदी वीडियो गेम्स को जाता है। टीवी कनेक्शन, लाइसेंस तथा रिकार्डेड म्यूजिक की वृद्धि भी दो अंकों में रही।
भारत से बेहतर कोई नहीं
प्राइसवाटर हाउस कूपर्स के मार्केल फेनेज के मुताबिक वर्तमान दौर में मीडिया और एंटरटेनमेंट क्षेत्र के विकास के लिए भारत से बेहतर कोई और जगह नहीं।