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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.पंजाब में 300 हैक्टेयर क्षेत्र में जैतून की खेती की जाएगी। यह फैसला आज यहां मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया।
इजराईल की कंपनी से विचार-विमर्श: पंजाब एग्रो इस सिलसिले में इजराईल की इंडो लाइव एंटर प्राइजेज नामक कंपनी से पहले ही विचार-विमर्श कर चुका है और इस कंपनी ने जैतून की खेती के लिए राजस्थान सरकार से भी समझौता किया है। राज्य का मौसम इस खेती के लिए अनुकूल माना गया है।
तीन गुणा ज्यादा फायदे की उम्मीद: धान और गेहूं के चक्कर की तुलना में जैतून की खेती से किसानों की आमदनी में तीन गुणा वृद्धि की उम्मीद है। इससे पानी की बचत, ज्यादा आमदनी, रोजगार के अवसर, विदेशी मुद्रा और पर्यावरण संतुलन जैसे फायदे होंगे।
पानी की खपत भी कम होगी:
वित्त आयुक्त, विकास आर. एस. संधू का कहना है, पंजाब में गेहूं और चावल की फसल लेने पर करीब ४५ हजार मीट्रिक क्यूबिक प्रति हैक्टेयर पानी की खपत होती है, जबकि जैतून की कृषि के लिए केवल पांच हजार मीट्रिक क्यूबिक प्रति हैक्टेयर खपत होगी। यह खेती टपका-टपका योजना के तहत की जानी है।
खेती सार्वजनिक-निजी भागीदारी में: पंजाब एग्रो के एमडी एस. के .संधू ने कहा, यह खेती सार्वजनिक-निजी भागीदारी में होगी और इसके लिए विश्व स्तर पर मांग पत्र लिए जाएंगे।
पंजाब सरकार, विदेशी कंपनी और एक भारतीय भागीदारी कंपनी की तरफ से बराबर की हिस्सेदारी में एक कंपनी स्थापित की जाएगी। के हिस्से से एक प्राईवेट कम्पनी स्थापित की जायेगी। यह कंपनी पंजाब के बारिश वाले उत्तरी, केंद्रीय व दक्षिणी क्षेत्रों में तीन-तीन व्यापारिक प्रोजेक्ट स्थापित करेगी।
प्रोजेक्ट की लागत 10 करोड़: इस प्रोजेक्ट पर 10 करोड़ रुपए की लागत आने की उम्मीद है। इसमें २५ फीसदी निवेश राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड और राष्ट्रीय बागवानी मिशन करेगा, ४५ फीसदी पंजाब सरकार और 30 फीसदी निवेश निजी निवेशक करेंगे।