नई दिल्ली.विश्वास मत हासिल करने के बाद तय है कि प्रधानमंत्री अपना एजेंडा बेपरवाह होकर लागू करेंगे। यूपीए के नेता मान रहे हैं कि नए आत्मविश्वास के बाद परमाणु करार पूरा करने के लिए सरकार का पूरी गति से चलना तय है। करार पर आईएईए और एनएसजी सदस्यों की सहमति लेने के लिए प्रधानमंत्री पहले ही अपने दूतों को विभिन्न देशों में भेजने का फैसला कर चुके थे।
साथ ही आर्थिक सुधारों के अगले चरण में पेंशन, इंश्योरेंस और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार प्राथमिकता से लागू होने हैं। उत्तरप्रदेश में अब मायावती के खिलाफ कांग्रेस-सपा के हमले तेज होंगे। सपा के कांग्रेस का साथी बनने से खत्म होने की कगार पर पहुंच चुके तीसरे मोर्चे का भविष्य भी साफ नहीं है। सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह किसी भी तरह इस साल के अंत तक कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले महंगाई को काबू में करे।
मजबूरियां अब भी हैं
सरकार को जीवनदान भले मिला हो, लेकिन यूपीए गठबंधन में अब वह मजबूती शायद ही रहे। सरकार अब जल्दी चुनाव में निश्चित नहीं जाना चाहेगी पर जितने ज्यादा दिन चलेगी उतनी ही उसकी मजबूरियां व कमजोरियां उजागर होंगी। ऐसा मानने वाले ज्यादा नहीं हैं कि वामदलों के बजाय समाजवादी पार्टी ज्यादा सुविधाजनक है। नरसिंहराव सरकार बचाने के लिए जेएमएम सांसदों की खरीद-फरोख्त का दाग अभी कांग्रेस के दामन से मिटा नहीं है। अब भाजपा सांसदों की कथित खरीद-फरोख्त का खामियाजा भी कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा।