नई दिल्ली. सोमनाथ चटर्जी ने कहा है कि माकपा उन्हें नोटिस नहीं दे सकती क्योंकि मैं पोलितब्यूरो मेंबर नहीं हूं। उन्होंने कहा, मैं फैसला करूंगा कि मुझे इस्तीफा कब देना है, देना भी है कि नहीं। उधर माकपा नेता बिमान बोस ने चटर्जी पर हमला बोलते हुए उनके पद पर बने रहने का औचित्य पूछा है। कहा है कि जब लेफ्ट पार्टियों ने यूपीए से समर्थन वापस ले लिया है तो वे पद पर क्यों बने हुए हैं। इससे पहले लोकसभा में पहुंचने पर जैसे ही सोमनाथ अपनी कार से नीचे उतरे, पत्रकारों ने उनसे पूछा कि वे अपना इस्तीफा कब दे रहे हैं। इस पर सोमदा ने कहा, ‘एक वरिष्ठ राजनेता की इज्जत करो।’
अपने ही सांसदों को लगाई फटकार
लोकसभा में विश्वास मत पर वित्त मंत्री पी चिदंबरम के संबोधन के दौरान वामदलों, विशेषकर माकपा के सांसदों की लगातार दखलअंदाजी से नाखुश लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इन सदस्यों को जमकर फटकारा। बहस के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब चटर्जी ने मुख्य विपक्षी दल भाजपा की ओर इशारा करते हुए वामदलों के सदस्यों से कहा कि उन्हें भाजपा के सदस्यों से सीख लेना चाहिए, क्योंकि वे दखलअंदाजी नहीं कर रहे हैं। चटर्जी ने कहा, ‘कृपया ये मत सोचिए कि मैं इसकी इजाजत दे रहा हूं। आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।’
एक अन्य मौके पर चटर्जी ने माकपा सदस्य एनएन कृष्णदास को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं समझना चाहिए कि वे इस तरह की ‘अनुशासनहीनता’ से अपना और अपनी पार्टी का गौरव बढ़ा रहे हैं। जब कांग्रेस महासचिव व सांसद राहुल गांधी के संबोधन के दौरान शोरगुल मचा तो चटर्जी ने कहा, ‘भारत की संसद अपनी सबसे बदतर स्थिति में पहुंच रही है। अब समय आ गया है कि संसद सदस्य चुनाव का सामना करें ताकि देश अपना फैसला दे सके।’
लोकसभा में उस वक्त भी हंगामा मच गया जब बसपा सदस्य ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी पार्टी के नेताओं व मायावती पर विश्वास मत के हक में मतदान का दबाव बनाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है। बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव की कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में बसपा सांसदों ने लोकसभा से वाकआउट कर दिया।
बहस के दौरान लालू यादव जैसे ही संबोधन के लिए खड़े हुए, बसपा सदस्य ब्रजेश पाठक ने भी खड़े होकर आरोप लगाया कि लालू ने टीवी चैनलों पर मायावती के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मायावती का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद वे बसपा के अन्य सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गए।