मुंबई.क्या आप उम्मीद कर सकते हैं कि पूजा-घर या फिर भजन कक्ष से कोई गुनाहों के कारनामे करता हो। जी हां, मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच की माने तो यह सच है। माफिया डॉन से राजनेता बने अरुण गवली अपने कारनामों को दगड़ी चाल में बने ‘भजन रूम’ से अंजाम देता है।
मुंबई पुलिस को यह पता गवली के खिलाफ हत्या और जबरन वसूली के मामलों की जांच के दौरान चला है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के मुताबिक, गवली का यह अड्डा पहली बार देखने से भजन का कमरा ही लगता है।
धर्म की आड़ में गुनाह :
अधिकारी के मुताबिक, दगड़ी चाल की पहली मंजिल पर दो फ्लैट के बीच बने इस कमरे को धार्मिक स्वरूप देने के लिए इसमें बकायदा तबला, हारमोनियम और वीणा रखे गए हैं। साथ ही देवी-देवताओं की मूर्तियां और चित्र भी लगे हैं। लेकिन असल में गवली गैंग के लोग यहां व्यापारियों और बिल्डरों से जबरन वसूली या मामलों को ‘निपटाते’ हैं।
भजन रूम में भाईगीरी:
अधिकारी ने बताया कि गवली के कोप भाजन के शिकार लोगों को ‘भजन’ की तर्ज पर ‘समझाया’ जाता है। इससे पहले यह तसल्ली कर ली जाती है कि उस व्यापारी या बिल्डर ने कहीं पुलिस या किसी और को खबर तो नहीं कर दी है। गवली और उसके साथी या तो रकम (पेटी, खोखा आदि) मांगते थे या फिर सीधे ‘मुद्दे’ पर बात करते थे।
क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने बताया कि दोनों फ्लैट अरुण गवली की पत्नी और उसके नजदीकी रिश्तेदार सुनील घाटे की पत्नी के नाम के हैं। वैसे, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) के अनुसार इन मकानों के स्वामित्व का पता लगाया जा रहा है।
‘गवली को लगता कि ‘शिकार’ यदि झूठ बोल रहा है, तो पहले वह भगवान की कसम खाने को कहत, फिर भी नहीं मानने पर अपने लोगों को उसका भजन (यातना) शुरू करने का आदेश देता था।’
- क्राइम ब्रांच का एक अधिकारी