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Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood परदे के पीछे.
आईनेक्स मीडिया की प्रमुख इंद्रानी मुखर्जी ने बयान दिया है कि उनकी संस्था इंदिरा गांधी के जीवन पर भव्य पैमाने पर हिंदी और अंग्रेजी में सीरियल बनाने जा रही है। यह एक महत्वाकांक्षी और साहसी योजना है। इंदिराजी के जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव रहे हैं।
बांग्लादेश से आए शरणार्थियों की बड़ी संख्या के बाद इंदिराजी अमेरिका गई थीं और मुलाकात के समय के लिए पाकिस्तान की ओर झुका हुआ अमेरिका संशय में था। उस वक्त भी इंदिराजी ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकना कतई स्वीकार नहीं किया था। वे लौट आईं और बांग्लादेश को आजाद करने में जुट गईं। ‘सेवन्थ फ्लीट’ से नहीं डरीं। बहरहाल संस्था की ओर से दिए गए बयान में यह खतरनाक बात भी कही गई है कि यह सीरियल इंदिराजी के महिला होने के नजरिये से बनाया जाएगा। क्या ये लोग सोप ऑपेरा की तरह इंदिरा सीरियल रचेंगे? ‘महिला एंगल’ बहुत ही खतरनाक और घटिया बात है। सीरियल में रोने-धोने और अत्याचार सहने वाली छवि अत्यंत भ्रामक है।
नकली नाटकीय स्थितियां बनाकर आंसू बहाकर लोकप्रियता हासिल करना सास-बहू सीरियल से प्रारंभ हुआ। इन्होंने महाभारत के सशक्त पात्र द्रोपदी को भी रीढ़हीन पात्र की तरह प्रस्तुत किया है। भारतीय महिला के बारे में यह संकीर्ण सोच ही अन्यायपूर्ण है। इंदिरा का ‘इस्पात’ इतना प्रसिद्ध रहा है कि उन्हें ‘महिलाओं की कैबिनेट में एकमात्र पुरुष’ कहा गया था। उन्होंने तो बचपन में भी अंग्रेजों के खिलाफ वानर सेना बनाई थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा कहा था तो आरएसएस द्वारा वाजपेयी की भत्र्सना की गई थी।
इंदिराजी ने सारे काम ‘पुरुषोचित’ ही किए थे। भला उनके जीवन पर तथाकथित महिला दृष्टिकोण से सीरियल बनाना कहां तक उचित होगा। एक बार बासु भट्टाचार्य इंदिराजी पर वृत्तचित्र बनाने गए थे। बैठक में एक सेवक डस्टर से जवाहरलाल नेहरू के विशाल चित्र को साफ कर रहा था। बासु ने इंदिराजी से कहा कि वे अपनी साड़ी के पल्लू से तस्वीर को साफ करें तो अच्छा भावना प्रधान शॉट लिया जा सकता है।
इंदिराजी के मन में अपने पिता के लिए अपार आदर था, परंतु उन्होंने पल्लू से तस्वीर साफ करने के विचार को निरस्त कर दिया। उनका कहना था कि यह काम डस्टर से ही किया जाता है। उन्हें मेलोड्रामा पसंद नहीं था। जब सत्यजीत राय ने नेहरू पर वृत्तचित्र बनाने से इनकार किया तब एक अफसर ने उन्हें विदेशी मुद्रा देने से इनकार कर दिया। सत्य मालूम होते ही इंदिरा जी ने अफसर को पद से हटाया और सत्यजीत राय को भरपूर विदेशी मुद्रा दी।