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अगले अंबानी युद्ध की तैयारी

मुंबई.अंबानी बंधुओं के बीच झगड़े के लिए मुद्दे खत्म नहीं हो रहे। अभी 70 अरब डालर के एमटीएन सौदे पर झगड़ा हो रहा था। अब नया मुद्दा आ गया है। सरकार की कोयले से तरर्ल ईधन बनाने (सीटीएल) की योजना पर दोनों भाई फिर आमने-सामने हैं।

झगड़े के आसार

सरकार की पहले सीटीएल के तहत तीन कोल (कोयला) ब्लाक आवंटित करने की योजना थी, लेकिन अब एक ही ब्लाक आवंटित करने का निर्णय लिया जा सकता है। इस कारण मुकेश व अनिल अंबानी को इकलौते ब्लाक पर दांव खेलना होगा।

क्या है योजना

परियोजना के तहत जीवाश्म को पेट्रोल, डीजल, नैफ्था, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ), एलपीजी जैसर्े ईधन के तरल प्रकार में बदलना है।

एक ही ब्लाक क्यों ?

सूत्रों का कहना है कि सीटीएल परियोजना के तहत रिसर्च व तकनीकी प्रयोग किए जाने हैं। इस संदर्भ में एक ब्लाक को ही इन कार्र्यो के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। पूर्व में उड़ीसा के तीन ब्लाक आवंटित करने की योजना थी। इसमें एक ब्लाक जो योजना के लिए चुना जा सकता है, उसमें तीन अरब टन कोयले का भंडार है। सरकार महज १.५ अरब टन खोदने की अनुमति देना चाहती है। बाकी हिस्सा दूसरे प्रयोगों में लाए जाने की योजना है।

अब अनिल का वचनभंग

इस बार अनिल अंबानी बड़े भाई मुकेश अंबानी के संग व्यापार के बंटवारे के समय हुई संधि लांघने को तैयार लग रहे हैं। जानकारों के अनुसार तरर्ल ईधन बनाने का कार्य मुकेश अंबानी के अधिकार क्षेत्र में आता है।

और कौन हैं दावेदार

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और अनिल अंबानी की रिलायंस पावर के अलावा बोली लगाने वाले अन्य समूहों में टाटा समूह, जीएमआर, इंडियाबुल्स, वीडियोकान इंडस्ट्रीज, गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लि., जेएसडब्ल्यू समूह तथा इंडियन आयल शामिल हैं।

कितना निवेश-कितना उत्पादन

रिलायंस व टाटा आदि समूहों ने सरकार से इस परियोजना में ८ अरब डालर निवेश का दावा किया था। टाटा ने इसके लिए दुनिया की सबसे बड़ी तरर्ल ईधन बनाने वाली दक्षिण-अफ्रीकी कंपनी सैसोल लि. के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित किया है। योजना के तहत ८क्,क्क्क् बैरल तेल का रोजाना उत्पादन करने की तैयारी है।





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