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हड़ताल से बेहाल

भोपाल. समूचे प्रदेश सहित राजधानी के आम लोग विभिन्न सरकारी दफ्तरों में अपने काम के लिए बेसहारा नजर आए। लिपिकों के आंदोलन की फैली आग ने अनेक विभागों को अपनी चपेट में ले लिया और किसी भी जगह स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक बंदोबस्त नहीं किए गए। जबकि आंदोलन के कारण जहां कलेक्टोरेट के अधिकतर विभागों में काम नहीं हुए वहीं लोक शिक्षण संचालनालय तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ताले लटके रहे।

प्रदेश में बीते 19 दिनों से चल रही लिपिकों की हड़ताल ने बुधवार को उस समय व्यापक रूप ले लिया जब मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ और राज्य कर्मचारी संघ भी इस आंदोलन में शामिल हो गए। हड़ताल का कलेक्टोरेट और तहसील कार्यालय पर व्यापक असर दिखाई दिया। दोनों स्थानों पर करीब 50 से अधिक पदस्थ लिपिक व उच्च श्रेणी लिपिक काम पर नहीं पहुंचे।

पेशियां आगे बढ़ीं
लिपिकों की गैरहाजिरी में विभिन्न मामलों की फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं। तहसील में तमाम जमीन आदि प्रकरणों की होने वाली पेशियों की तारीखें तहसीलदारों को बढ़ाना पड़ीं। कलेक्टोरेट में भू-अभिलेख,आय व जाति प्रमाण पत्र, बीपीएल, राशनकार्ड, हथियार लाइसेंस व विवाह रजिस्ट्रेशन आदि के काम ठप रहे। अधिकांश अधिकारी काफी कम समय दफ्तर में बैठे। लोक शिक्षण संचालनालय के कई विभागों में ताले ही नहीं खुले।

भटकते रहे शिक्षक और विद्यार्थी
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही दिनभर ताला लटकता रहा। जिससे वहां अनेक अभिभावक तथा विद्यार्थी मार्कशीट पर काउंटर साइन के लिए परेशान होते नजर आए। कई को ट्रांसफर की खातिर एनओसी, डुप्लीकेट मार्कशीट चाहिए थी। अनेक शिक्षक भी अपने काम के लिए लोक शिक्षण संचालनालय में भटकते रहे। आंदोलन का व्याख्याताओं की पदोन्नति प्रक्रिया पर भी असर हुआ।

शत-प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर
सरकार के अन्य दस विभागों में आंदोलन का व्यापक और छह में कम असर रहा। विंध्याचल भवन स्थित ग्रामीण विकास, सहकारिता, सांख्यिकी, मत्स्य, पीएचई, आदिमजाति कल्याण विभाग, रेशम संचालनालय, तकनीकी शिक्षा, पशु चिकित्सा, जल संसाधन, पंचायत और स्कूल शिक्षा विभाग में शत-प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे। जबकि राज्य योजना मंडल, फर्म एंड सोसायटी, उद्योग और कृषि विभाग में हड़ताल का कम असर रहा। वन और स्वास्थ्य विभाग में लिपिकों को छोड़ शेष स्टाफ ड्यूटी पर रहा।

मुश्किल होगा वेतन मिलना
हड़ताल में वित्त और लेखा तथा कोषालय विभागों के कर्मचारी शामिल होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। आशंका जताई जा रही है कि यदि एक सप्ताह में लिपिकों की मांगों पर निर्णय नहीं हुआ, तो प्रदेश में जुलाई का वेतन समय पर वितरित नहीं हो सकेगा। मप्र वित्त सेवा अधिकारी संघ और मप्र लेखा सेवा अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक आदित्य नागर ने बताया कि 32 जिलों के कोषालय कर्मचारी हड़ताल पर हैं। संघ की तीन सूत्रीय मांगों पर भी सरकार का ध्यान नहीं है। इस संबंध में रणनीति तय की जा रही है।

हड़ताल का पहला दिन था और आयुक्त व अन्य अधिकारी इंदौर में थे। इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। यदि निर्णायक बैठक में हड़ताल समाप्त कराने की पहल नहीं हुई तो गुरुवार से वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
-डॉ. केके पांडे, संयुक्त संचालक,लोक शिक्षण संचालनालय

विकल्प के रूप में खास काउंटरों पर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। खासकर जिन काउंटरों पर जाति व मूल निवासी आदि प्रमाण पत्र बनते हैं।
-कवींद्र कियावत, अपर कलेक्टर

कार्यालय के सभी कर्मचारी हड़ताल पर रहे हैं। पहले दिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। कुछ लिपिकों ने काम करना भी चाहा, लेकिन उनके अन्य साथियों ने काम नहीं करने दिया। वैसे गुरुवार से शहर के कुछ शिक्षकों को कार्यालय बुलाया गया है।
-धीरेंद्र चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी





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