|
भोपाल. शहर की एक इंश्योरेंस कंपनी में बीते दिनों एक व्यक्ति गाड़ी के क्लैम के सिलसिले में आया। कागजात देखने पर पता चला कि कंपनी ने उसे इंश्योरेंस की कोई पालिसी ही जारी नहीं की थी। हालांकि उसके पास कंपनी का कवर नोट था, जो जांच में फर्जी पाया गया। संबंधित व्यक्ति को बीमा की राशि का भुगतान नहीं किया जा सका।
राजधानी में ऐसे अनेक मामले सामने आ रहे हैं। जिनमें वाहन खरीदने वाले का सीधा नुकसान होता है। दरअसल, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत बगैर रजिस्ट्रेशन या इंश्योरेंस कोई भी वाहन शोरूम से बाहर नहीं आ-जा सकता। इस नियम को धता बताकर ग्राहकों को ठगने का काम शुरू हो गया है। प्रतिष्ठित बीमा कंपनियों के फर्जी कवरनोट के जरिए वाहनों का बीमा कर दिया जाता है।
ऐसे ही फर्जीवाड़े के माध्यम से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से वाहन का रजिस्ट्रेशन भी करा लिया जाता है। वाहन मालिक को इसकी असलियत तब पता चलती है, जब किसी कारण से उसे वाहन के बीमा की राशि की जरूरत होती है। इस गड़बड़ी के चलते आलम यह है कि राजधानी समेत प्रदेशभर की सड़कों पर बगैर इंश्योरेंस नए वाहन आज भी दौड़ रहे हैं। ऐसे वाहनों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) पंजीयन भी हो जाता है।
एक इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी तुषार कुमार बताते हैं कि हाल ही में एक व्यक्ति गाड़ी के क्लेम के सिलसिले में उनकी कंपनी के दफ्तर आया था। उसके पास कंपनी का कवरनोट था, लेकिन कंपनी ने इंश्योरेंस की कोई पालिसी जारी नहीं की थी। छानबीन करने पर पता चला किसी ने उसे कंपनी का फर्जी कवरनोट थमा दिया था। जिसके आधार पर गाड़ी शोरूम से निकल गई थी। उसी व्यक्ति ने आरटीओ कार्यालय से पंजीयन भी करा दिया था।
एक इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी अरशद खान मानते हैं कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं। खुलासा तब होता है, जबकि दुर्घटनाग्रस्त होने पर गाड़ी मालिक क्लेम के सिलसिले में इंश्योरेंस कंपनी के दफ्तर पहुंचता है। उन्होंने बताया कि जून में एक व्यक्ति ने कार के बीमा के लिए पोस्ट डेटेड चेक देकर कंपनी से कवर नोट ले लिया। चेक बाउंस करवाकर कंपनी के खाते का भुगतान रोक लिया और बीमा पालिसी में देरी होने का शपथ पत्र देकर आरटीओ कार्यालय से पंजीयन करवा लिया।
कैसे होता है फर्जीवाड़ा
इंश्योरेंस के कारोबार में लिप्त लोगों ने प्रतिष्ठित बीमा कंपनियों के फर्जी कवरनोट बनवाकर रखे हैं। वाहन खरीदार के संपर्क में आने के बाद फर्जी कवरनोट काटकर फोटोकापी में संबंधित डीलर को फैक्स कर दिया जाता है। ओरिजनल मांगने पर फर्जी कवरनोट दिखा दिया जाता है। गाड़ी बाहर आने के कुछ दिन बाद ग्राहक द्वारा पंजीयन कार्ड मांगने पर शपथपत्र लगाकर आरटीओ में प्रस्तुत किया जाता है। शपथपत्र में बीमा पालिसी की देरी का बहाना बताया जाता है। जिसके आधार फर्जी कवर नोट के आधार पर वाहन का पंजीयन भी हो जाता है।
वाहन खरीदार रखें ध्यान..
-बगैर बीमा और पंजीयन के वाहन न खरीदें
-प्रतिष्ठित कंपनी से इंश्योरेंस कराएं
-कवरनोट की ओरिजनल कापी प्राप्त करें
-कवरनोट के काल सेंटर नंबर पर काल जानकारी लें
-पालिसी में देरी होने पर संबंधित बीमा कंपनी से बातचीत करें
- दुर्घटना या हादसे के बाद संबंधित बीमा कंपनी को सूचित करें
- बीमा समाप्त होने पर तत्काल नवीनीकरण कराएं
बगैर रजिस्ट्रेशन और इंश्योंरेंस वाहनों का सड़कों पर संचालन मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है। मामलों की जानकारी एकत्रित कराई जाएगी। यदि ऐसे मामले प्रकाश में आए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-आरआर त्रिपाठी, आरटीओ
बीमा किस कंपनी से कराना है, इसके लिए ग्राहक स्वतंत्र हैं। ग्राहक को चाहिए कि प्रतिष्ठित कंपनियों से बीमा करवाकर ओरिजनल कापी प्राप्त करे। वहीं, डीलर व सबडीलर भी ग्राहकों को कंपनी से ही बीमा कराने के लिए प्रेरित करें।
-सौरभ गर्ग, संचालक, मायकार