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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. जगदलपुर नेशनल हाईवे पर अभनपुर से पांच किमी के दायरे में तीन दिन में पांच युवकों की जान चली गई। छह महीने में इस मार्ग पर दो दर्जन से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। इस साफ-सुथरे और चौड़े हाईवे पर वाहन चलाते हुए लोग रायपुर के आउटर से अभनपुर तक कुछ सहमे से रहने लगे हैं।
दैनिक भास्कर ने आज निमोरा मोड़ से एक पब्लिक स्कूल तक हाइवे पर खामियों की पड़ताल की, जहां अक्सर हादसे होते हैं। भारी वाहनों की अंधाधुंध ओवरटेकिंग से आधी कहानी साफ हो गई। ट्रैफिक का ये आलम है कि सामने से ट्रक या बस आए और छोटे वाहन वाले अपनी गाड़ी सड़क से उतारें तो खतरा बढ़ सकता है। लेकिन कारें और दोपहिया वाले बरसात के मौसम में कीचड़ के डर से वाहन किनारे नहीं ले जा रहे हैं और हादसे बढ़ने लगे हैं।
राजधानी के वरिष्ठ वास्तुविद मानते हैं कि अभनपुर मार्ग ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुकूल नहीं है। रेडिएंट स्कूल मोड़ पर नई राजधानी क्षेत्र को जोड़ने वाला चंपारण्य मार्ग जुड़ता है। ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा और निर्माणाधीन प्रशासन अकादमी की सड़क पर यहीं हाईवे पर खुलती है।
इस वजह से ट्रैफिक और खतरा, दोनों बढ़ा है। यहां हाइवे ऊंचाई पर है, लेकिन इसके लेवल में संपर्क मार्ग नहीं होने से लोगों को हाइवे पर दौड़ने वाले तेज रफ्तार वाहन अक्सर दिखाई नहीं देते। जब तक लोग मोड़ पर आते हैं, या तो उनकी किसी भारी वाहन से टक्कर हो जाती है या इनकी चपेट में आ जाते हैं।
बेकाबू वाहनों की गति पर लगाम लगाने वहां स्थानीय लोग ब्रेकर बनाने की मांग कई बार कर चुके हैं। मोड़ एक हिस्से में 10 फीट चौड़ी जगह पर दिन-रात ट्रक वालों का कब्जा रहने लगा है। गहरे गे बन गए हैं, जो बरसात में भरकर खतरनाक होने लगे हैं। ओवरटेक करते वाहन अक्सर इनकी चपेट में आ रहे हैं।
कई जगह धसकी सड़क
रेडिएंट से मिंटू पब्लिक स्कूल के मध्य हाइवे का एक हिस्सा धसक गया है। दुर्घटनास्थल के आगे-पीछे दो-तीन किलोमीटर तक उधड़ी सड़क पर डामर की मोटी परत चढ़ाई गई है, यानी एक हिस्सा स्पीड ब्रेकर का काम कर रहा है। इसमें से एक किलोमीटर का रास्ता उबड़ खाबड़ है, जहां हादसे हो रहे हैं। यहां सड़क 15 से 20 फीट चौड़ी रह गई है। तेज रफ्तार वाहन यहां संभल नहीं पाते। लोगों का कहना है कि यह इलाका खतरनाक हो चला है, बावजूद इसके यहां कोई संकेतक नहीं है।
सिहर उठते हैं प्रत्यक्षदर्शी
रेडिएंट स्कूल के पास हुए हादसों को याद कर प्रत्यक्षदर्शी सिहर उठते हैं। वहां पान ठेला चलाने वाले राजेश वर्मा ने बताया कि कि कुछ दिनों पहले पुलिस वालों की मौजूदगी में हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रकों पुलिस वालों ने रोकने की कोशिश। अचानक ब्रेक लगाया तो ट्रक के पीछे चल रहा बाइक सवार बुरी तरह टकरा गया। हादसे में युवक का सिर फट गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ऐसा ही एक हादसा डेढ़ महीने पहले उसी जगह पर हुआ जब एक युवक बस के इंतजार में खड़ा था, तभी बेकाबू बाइक सवार ने उसे ऐसी टक्कर मारी कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई।
आर्किटेक्चर ही गलत
आर्किटेक्ट सुरजीत मजूमदार ने बताया कि अभनपुर रोड का आर्किटेक्चर ही गलत है। कायदे से किसी भी हाइवे को बीच में हायर और दोनों साइड स्लोप होना चाहिए, लेकिन अभनपुर रोड के ज्यादातर हिस्से में एक साइड स्लोप है। दूसरा रेडिएंट स्कूल मोड़ पर संपर्क मार्ग लेवल में नहीं है। वे हाइवे की तुलना में काफी डाउन हैं, यही वजह है कि उन्हें हाइवे के तेज रफ्तार वाहन दिखाई नहीं देते।
आर्किटेक्ट एसोसिएशन के सचिव सौरभ रहटगांवकर के मुताबिक रेडिएंट स्कूल पास मार्ग ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुकूल नहीं हैं। हादसों को रोकने के लिए सड़क किनारे खड़े ट्रकों हटाए जाए और हैवी ट्रैफिक को कंट्रोल के लिए ब्लिंकर्स लगाए जाएं।
अभनपुर रोड पर बारिश में दुर्घटनाओं के बढ़ते खतरों को ध्यान में रखकर हाइवे पेट्रोलिंग और संबंधित थानों को अलर्ट का दिया गया है। हाइवे की खामियां दूर करने संबंधित विभाग से पत्राचार किया जा चुका है।
अमित कुमार, एसपी रायपुर
जरा चुके और..
:21 जुलाई को केंद्री मोड़ पर हादसे में दो युवकों की मौत
:20 जुलाई को चंरारण्य रोड पर हादसे में तीन की मौत
:07 जुलाई को शदाणी दरबार के पास हादसे में युवक जख्मी
:03 जुलाई को देवपुरी के पास हादसे में स्कूली छात्र की मौत
:28 जून को माना के पास बस के पलटने से युवक की मौत
:24 अप्रैल को देवपुरी के पास हादसे में एक युवक की मौत
:23 अप्रैल को देवपुरी में बस-ट्रक की टक्कर में एक की मौत
:20 अप्रैल को गोदड़ीवाले धाम के पास हादसे में कारोबारी की मौत
:27 मार्च को शदाणी दरबार के पास हादसे में तीन लोगों की मौत
:20 मार्च की आधी रात अभनपुर से पहले बाइक सवार दो युवकों की मौत
:19 मार्च रेडिएंट स्कूल के पास मोटरसाइकिल से फिसलकर मां-बेटे की मौत।
ट्रांसपोर्टरों के सुझाव
रायपुर ट्रक ओनर्स एसोसिएशन के सचिव सुनील कुमार बरड़िया ने कहा कि सड़क पर पीली लाइन के बाहर ही ट्रकों की पार्किग की जानी चाहिए। खड़े ट्रकों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए पीछे लोहे का डंडा लगाना जरूरी है। इससे भिड़ने वाले छोटे वाहन ट्रक के भीतर नहीं घुसते। ऐसी कई सुझाव समय-समय पर ट्रक मालिकों और चालकों को एसोसिएशन की तरफ से दिए जाते हैं, लेकिन पालन नहीं हो रहा है।