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आबंटी कोई, पट्टा किसी को

जयपुर. वैशाली नगर क्षेत्र में संयुक्त गृह निर्माण सहकारी समिति की आवासीय योजना ऑफिसर्स कैम्पस विस्तार योजना में जेडीए ने फर्जी सूची के आधार पर मूल आबंटियों की बजाए दूसरों को पट्टे जारी कर दिए। इतना ही नहीं, जेडीए ने जिस सूची को इस योजना के नियमन का आधार माना वह सूची भी सोसायटी पर प्रशासक नियुक्त रहते पेश की गई।

इस सूची पर प्रशासक के हस्ताक्षर नहीं हैं। अब मामले की लोकायुक्त सचिवालय की ओर से जांच शुरू की गई है। लोकायुक्त ने जेडीए आयुक्त से योजना में हुए फर्जीवाड़े के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। दूसरी तरफ इस मामले की शिकायत गृहमंत्री तक पहुंचने के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने भी प्रकरण की पड़ताल शुरू कर दी।

उच्च स्तर पर शुरू हुई जांच के प्रारंभिक दौर में पता चला है कि इस योजना के रिकॉर्ड में हेरफेर कर सोसायटी के संचालकों ने ऐसे लोगों को पट्टे दे दिए, जिनका योजना में पहले कोई भूखंड नहीं था। इसके बाद जेडीए के रिकॉर्ड में भी फेरबदल किया गया और सहकारिता प्रकोष्ठ के अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी पट्टों के आधार पर नाम ट्रांसफर करवा लिए गए। एक दो मामले ऐसे भी हैं जिनमें जेडीए से नाम ट्रांसफर से संबंधित पत्राचार पुलिस अफसरों के घर के पते पर हुआ है।

फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए सोसायटी की ओर से 1994 की मूल सूची में फेरबदल कर 1999 में नई सूची पेश की गई जिसमें 220 भूखडों में या तो अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए या आबंटी का नाम खाली छोड़ दिया गया। इसके बाद जेडीए ने इस योजना का नवंबर 2002 में नियमन करके पट्टे जारी कर दिए।

सहकारिता विभाग ने माना रिकॉर्ड में हेरफेर हुई
जेडीए और सोसायटी की ठगी के शिकार हुए लोगों ने भूखंड नहीं मिलने पर उच्च स्तर पर शिकायत की तो इस मामले की कलई खुलती चली गई। इस योजना में ठगी के शिकार होने वालों में कई सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें से एक मूल आबंटी लीला शर्मा की ओर से गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक, लोकायुक्त और प्रमुख शासन सचिव सहकारिता को शिकायत दर्ज कराई गई।

शिकायत पर जब सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव चंद्रमोहन मीणा ने उप शासन सचिव से जांच कराई तो सामने आया कि सोसायटी ने 1999 में जो सूची पेश की उसमें रिकॉर्ड में हेरफेर कर 1994 के आबंटियों के नाम हटा दिए गए। इसके अलावा जांच में तथ्य भी उजागर हुआ कि सोसायटी के पदाधिकारी रविदत्त शर्मा ने अधिकार नहीं होने के बावजूद सूची पेश की क्योंकि इस सोसायटी पर राज्य सरकार ने 1995 में प्रशासक नियुक्त कर दिया था।

जोन कार्यालय की गलती नहीं
इसमें जोन कार्यालय की गलती नहीं हैं, हमने तो सहकारिता प्रकोष्ठ से जानकारी के आधार पर पट्टे जारी किए हैं। सहकारिता प्रकोष्ठ ने सोसायटी की सूची को आधार मानकर जिन भूखंडों के नाम ट्रांसफर किए, हमने पट्टे जारी कर दिए। लीला शर्मा वाले मामले में नाम ट्रांसफर होने के बाद स्वामित्व का विवाद सामने आने के बाद पट्टा देने की प्रक्रिया रोक दी गई है।
—एस. मित्रा, उपायुक्त, जोन-7, जेडीए

अभी नहीं भेजी लोकायुक्त को रिपोर्ट
जो किया पूर्व अधिकारियों ने किया। योजना का नियमन मेरे कार्यकाल में नहीं हुआ। वैसे सोसायटी पर राज्य सरकार ने यदि प्रशासक नियुक्त कर रखा है तो कोई भी पदाधिकारी जेडीए में नई सूची पेश नहीं कर सकता। इस मामले में सीएम हाउस और लोकायुक्त सचिवालय ने रिपोर्ट मांगी है, जो अभी भेजी नहीं है। एक-दो दिन में रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
—इंद्रराज मीणा, उप रजिस्ट्रार (जेडीए सहकारिता प्रकोष्ठ)

एमआई रोड पर रहेगा एक तरफा यातायात
बीसलपुर पेयजल परियोजना की लाइन डालने का काम गुरुवार से पिंकसिटी पेट्रोल पंप से खासाकोठी तक किया जाएगा। पंप से खासाकोठी व कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले वाहन पंप से गणपति प्लाजा, पोलोविक्ट्री होकर निकल सकेंगे।





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