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इंदौर. चार साल में सरकारी शिक्षा का परिदृश्य बदला और परिणामों में सुधार भी हुए हैं। फिर भी जिन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया वे चुनौती के रूप में लें। सरकारी स्कूलों के प्राचार्य चॉक, वॉक और टॉक पद्धति पर काम करें।
स्कूल 15 मिनट पहले आएं। उन्हें देख शिक्षक भी जल्दी आएंगे। शुरुआत में घंटी बजते ही स्कूल का भ्रमण करें। किसी कक्षा में शिक्षक न हो तो क्लास लें। छात्र व स्टाफ से बातचीत बनाए रखें, किसी तरह की दूरी न रखें।
ये बातें लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सत्र 2008-09 के लिए हाईस्कूल व हायर सेकंडरी प्राचार्यो की संभागीय समीक्षा बैठक में कही र्गइ। बुधवार को एसजीएसआईटीएस में हुई बैठक में आयुक्त बी.आर. नायडू ने कहा शिक्षक ठान लें कि हम नौकरी नहीं एक पीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं तो करने को एक साल है।
हाईस्कूल परिणाम में धार ने 47 से 85 प्रतिशत छुआ है जबकि बुरहानपुर तीन प्रतिशत नीचे आ गया। परिणाम सुधारने के साथ बच्चों के दिमाग में भी डालना होगा कि वे बड़े पद प्राप्त कर सकते हैं। मैं भी छठी से आठवीं तक पेड़ के नीचे पढ़ा हूं। संचालक अवधकिशोर मिश्रा ने कहा इस बार 11 प्रतिशत रिजल्ट बढ़ा है, अब तय करें कि इस सत्र में परिणाम 90 से 100 प्रतिशत ही रहेगा।
राजेंद्रप्रसाद गुप्त ने शैक्षणिक गुणवत्ता पर बोलते हुए दिसंबर में कोर्स पूरा करने का कहा तो प्राचार्य बोल उठे जुलाई खत्म होने को है, आधे से ज्यादा शिक्षक चुनावी कार्य में लगे हैं। बच्चों को किताबें ही नहीं मिलीं। ड्रेस वितरण हुआ है, साइकिल बांटना बाकी है।
एक व्याख्याता के पास 10 स्कूलों के शिक्षक-पालक संघ चुनाव हैं। अक्टूबर में दशहरा-दीपावली की छुट्टियां होंगी और नवंबर में चुनाव। इस पर संयुक्त संचालक कौशलकिशोर पांडे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए बोले कलेक्टर को भी कोर्ट का आदेश बताएं। वे बर्खास्त कर देंगे तो हम बहाल करेंगे लेकिन अधिसूचना से पहले चुनावी कार्य न करें।
प्राचार्यो के उन्मुखीकरण के लिए आयोजित बैठक में संयुक्त संचालक एस.बी. सिंह, जिला शिक्षाधिकारी और प्राचार्य उपस्थित थे। संयोगितगंज स्कूल के प्राचार्य पी.सी. जैन ने त्नश्रेष्ठ प्राचार्य कैसे बनें, संध्या चौधरी ने पायलट प्रोजेक्ट, शाहिद नागौरी ने योजनाओं व सहायक संचालक कुलदीपसिंह यादव ने विभागीय जांच की जानकारी दी।
पिछले साल के ही 1500 उधार हैं
प्राचार्यो ने किताबें न मिलने की परशानी रखी तो श्री पांडे ने कहा 4-5 दिन में मिल जाएंगी। फिर पूछा कितने प्राचार्यो ने पुस्तकें खरीद लीं तो कुछ ने हाथ उठाए। खंडवा की प्राचार्य ने कहा नौवीं से बारहवीं की तीन तरह की किताबें मिलीं, वे भी पूरी नहीं। राऊ के प्राचार्य बोले मैंने गत सत्र में 1500 रुपए की उधार पुस्तकें खरीदी थीं, अभी तक पैसा नहीं मिला। श्री पांडे ने डीईओ माया मालवीय से पूछा लेकिन वे जवाब नहीं दे परइ।
सभी निरुत्तर : बैठक में धार, खरगोन, झाबुआ, बुरहानपुर, इंदौर और खंडवा के जिला शिक्षाधिकारी (डीईओ) मौजूद थे। एक प्राचार्य ने पूछा- कोर्स बदलने से जमा पुरानी किताबों का क्या करें? तीन हजार से ज्यादा की रद्दी भी नहीं बेच सकते। श्री पांडे ने पूछा इसका जवाब कौन डीईओ देगा, तो सभी चुप्पी साध गए। फिर बताया मई में ही आदेश निकाल दिया है कि ये किताबें बच्चों को ही दे दें।
प्राचार्य सम्मानित : बैठक में हाईस्कूल में 80 से 100 प्रतिशत रिजल्ट देने वाले 70 से अधिक प्राचार्यो को श्री नायडू ने प्रशस्ति पत्र दिए। इनमें इंदौर जिले के 29 प्राचार्य शामिल थे।