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अजमेर. नगर सुधार न्यास ने कोटड़ा आवासीय योजना में ग्रुप हाउसिंग के लिए एक जमीन नीलाम कर 3 करोड़ 95 लाख रुपए की आय कर ली। अभी दूसरे भूखंड की नीलामी नहीं हो पाई है।
न्यास के इतिहास में नीलामी से यह तीसरी बड़ी आय है। इसके पूर्व पंचशील में मॉल के लिए बारह करोड़ से अधिक में और चंद्रवरदाई नगर में करीब ग्यारह करोड़ में जमीन नीलाम की गई थी।
तब आई जान में जान
न्यास ने कोटड़ा आवासीय योजना में ग्रुप हाउसिंग के लिए दो भूखंडों की नीलामी रखी थी। इसमें एक भूखंड 13,351 वर्ग गज और दूसरा भूखंड 7,800 वर्गगज का था। न्यास ने सुबह 11 बजे नीलामी शुरू कर दी थी, लेकिन एक-दो ही खरीददार आए और अफसर इंतजार करते रहे। करीब एक बजे जयपुर से मंगलम बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य दो कंपनियों ने अमानत राशि जमा कराई। तब अफसरों की जान में जान आई।
4000 से 4170 तक
न्यास ने नीलामी न्यूनतम मूल्य 4000 रुपए से शुरू की। बोली शुरू होते ही खरीददारों का कहना था कि 15 प्रतिशत जमीन पर आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के लिए आवास बनाने और पार्किग के लिए स्थान छोड़ने का सरकार का आदेश अन्य निकायों पर लागू नहीं हुआ है, इसलिए यहां भी यह बाध्यता हटाई जाए। इसको लेकर दोनों पक्षों में काफी देर तक बहस होती रही। आखिर में सचिव पीसी किशन ने कहा कि सरकार इस आदेश में कोई संशोधन करेगी, तो हम भी लागू कर देंगे। इसके बाद जाकर बोली शुरू हुई।
ट्रस्टियों ने किया बहिष्कार
न्यास प्रशासन द्वारा नीलामी से पहले सरकार से मार्गदर्शन नहीं लेने पर नीलामी और आवंटन कमेटी के ट्रस्टी शरीक नहीं हुए। इससे पहले नीलामी में ट्रस्टी शरीक होते रहे हैं।
दो बार बढ़ाना पड़ा समय
बोली 4020 रुपए पर आकर अटक गई। नीलामी का समय समाप्त होते देख सचिव किशन ने नीलामी का समय बढ़ाकर पांच बजे तक कर दिया। करीब दो घंटे में धीरे-धीरे बोली 4100 रुपए प्रति वर्गगज तक पहुंची। समय कम होने की वजह से सचिव ने फिर समय बढ़ाकर छह बजे कर दिया। इसके बाद बोली 4170 रुपए प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई। खरीददारों ने इसके आगे बोली लगाने से इनकार कर दिया और अमानत राशि लौटाने की बात कही। सचिव ने मंगलम प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर 4170 रुपए प्रति वर्गगज के भाव से बोली छोड़ दी। समय बीत जाने की वजह से न्यास दूसरे भूखंड की नीलामी शुरू ही नहीं कर पाया। हालांकि नीलामी में शरीक होने के लिए दो खरीददारों ने राशि जमा कराई थी।
अधूरी तैयारियां
न्यास ने कोटड़ा आवासीय योजना में नीलामी तो रख ली, लेकिन जमीन पर लगी झाड़ियां आदि नहीं हटरइ, जिससे खरीददारों को जमीन का आकलन करने में काफी कठिनाई आई। सचिव पीसी किशन ने नीलामी शुरू होने के बाद जेसीबी से झाड़ियां हटवरई।
इनका कहना है..
मंगलम प्राइवेट लिमिटेड को एक चौथाई राशि 24 घंटे के भीतर जमा करानी होगी। नीलामी में आई दर मंजूरी के लिए कलेक्टर को भेजी जाएगी। वैसे बोली छोड़ने के पहले कलेक्टर की सहमति ले ली थी। इसके बावजूद दर कम लगने पर कलेक्टर चाहें, तो नीलामी स्थगित भी कर सकते हैं।
i>-पीसी किशन, सचिव, यूआईटी
न्यास ने हमारी फर्म के नाम बोली छोड़ दी है। न्यास ने कलेक्टर से मंजूरी लेने के बाद गुरुवार को मांग-पत्र देने की बात कही है। मांग-पत्र मिलने पर राशि जमा करा देंगे। फर्म अजमेर में आधुनिक आवास बनाकर देगी, जिसमें सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
-विनोद कुमार गोयल, निदेशक, मंगलम बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड
लीपा-पोती..
यह बात सही है कि कलेक्टर एवं न्यास अध्यक्ष नवीन महाजन ने 4500 रुपए से कम की दर पर जमीन नहीं छोड़ने की बात कही थी। मैं खुद भी यह चाहता था कि न्यास को 5000 रुपए से कम दर नहीं मिलनी चाहिए थी। बाद में परिस्थितियां ऐसी बनीं कि कलेक्टर के निर्देश पर 4170 रुपए में नीलामी छोड़ दी।
-पीसी किशन, सचिव, यूआईटी
फिलहाल इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। कुछ बातें हैं जो मीडिया को नहीं बता सकता।
-नवीन महाजन,कलेक्टर एवं न्यास अध्यक्ष
न्यास ने पहले आवंटन समिति को नजरअंदाज किया। इसके बाद बेशकीमती जमीन सस्ते भाव में बेच दी। इससे पहले न्यास नीलामी में भूखंडों की नीलामी 5000 रुपए प्रति वर्गगज के हिसाब से कर चुका है। सही समय आने पर हम उचित मंच पर इस बात को उठाएंगे।
-कन्हैया सोनी, ट्रस्टी एवं अध्यक्ष, आवंटन एवं नीलामी समिति
जवाब मांगते सवाल
ट्रस्टियों के विरोध के बावजूद नगर सुधार न्यास द्वारा बेशकीमती जमीन को सस्ते में नीलाम करने पर अनेक सवाल खड़े हो गए हैं। न्यास भले ही चार करोड़ रुपए की आय को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन बाजार के जानकारों की मानें तो इस नीलामी में न्यास को कम से कम एक करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। उधर, नीलामी के ठीक बाद कई सवाल भी खासे चर्चा में आ गए हैं।
>> न्यास ने पहले जमीन की नीलामी में न्यूनतम बोली पांच हजार रुपए प्रति वर्गगज और अमानत राशि 23 लाख रुपए रखी थी, लेकिन नीलामी से दो दिन पहले अचानक न्यूनतम बोली 4000 रुपए और अमानत राशि घटाकर 19 लाख रुपए क्यों कर दी? >> सचिव पीसी किशन ने नीलामी के दौरान सार्वजनिक रूप से कलेक्टर का हवाला देते हुए 4500 रुपए प्रति वर्गगज से कम जमीन नहीं बेचने की बात कही थी। सचिव दर 5000 रुपए प्रति वर्गगज बता रहे थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि जमीन 4170 रुपए प्रति वर्गगज के हिसाब से बेच दी गई?
>> नीलामी के दौरान खरीददारों ने सचिव से पूछा कि नीलामी किस दर पर छोड़ना चाहते हैं, तब सहायक नगर नियोजक राजेश वर्मा ने कहा कि पांच हजार रुपए से कम में बोली नहीं छोड़ेंगे। फिर बोली कम पर कैसे छोड़ी?
>> न्यास ने इससे पहले कोटड़ा मे एकल आवासीय भूखंडों की नीलामी 5000 रुपए प्रति वर्ग गज तक की थी। इसके अतिरिक्त योजना क्षेत्र में बाजार भाव 4500 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक हैं। फिर इतनी कम दर पर जमीन बेचने की क्या मजबूरी रही?