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नई दिल्ली.
केंद्र सरकार रामसेतु प्रकरण में भगवान राम द्वारा खुद ही रामसेतु को नष्ट करने की विवादित दलील से आहत महसूस कर रहे हिंदुओं के एक वर्ग की भावनाओं पर मरहम लगाने में जुट गई है। उसकी ओर से वरिष्ठ वकील एफएस नरीमन ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि सेतु समुद्रम परियोजना के बारे में शीर्ष कोर्ट के सुझाव को उच्च स्तर तक पहुंचा दिया गया है तथा उस पर विचार हो रहा है। शीर्ष कोर्ट ने परियोजना के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशने का सुझाव दिया था।
नरीमन ने बताया कि सरकार परियोजना पर आगे नहीं बढ़ रही है क्योंकि इससे एडम्स ब्रिज प्रभावित होगा। उन्होंने चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन नीत बेंच को यह जानकारी दी। ध्यान रहे कि कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से यह पता करने को कहा था कि क्या इस परियोजना में कोई वैकल्पिक रास्ता निकाला जा सकता है? बहस के दूसरे दिन नरीमन ने इस आरोप को खारिज करने की कोशिश की कि केंद्र परियोजना संबंधी विस्तृत रिपोर्ट तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत असर की परवाह किए बगैर राजनीतिक कारणों से प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहा है।
हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ : भाजपा भाजपा ने केंद्र सरकार के रामसेतु संबंधी हलफनामे को विरोधाभासों से भरपूर बताया है। पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा है कि भाजपा हमेशा से मानती रही है कि मनमोहन सिंह नीत सरकार दुनियाभर के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करती आ रही है। यह हलफनामा प्रधानमंत्री द्वारा डीएमके को दी गई घूस है।
- ‘रामसेतु पर हमारी स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है और वह सुप्रीम कोर्ट में पहले पेश किए गए दो हलफनामों से निर्देशित है।’
- मनीष तिवारी, कांग्रेस प्रवक्ता