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कोलकाता.केंद्र में यूपीए से संबंध तोड़ने के बाद वाम दलों को अब पश्चिम बंगाल में चल रही औद्योगिक परियोजनाओं की चिंता सताने लगी है। इस चिंता से छुटकारा पाने के लिए वाम दल अब राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की ओर देख रहे हैं। पार्टी चाहती है कि रिश्ते को कामचलाऊ बनाए रखने के लिए भट्टाचार्य की सर्वमान्य छवि का इस्तेमाल किया जाए, ताकि परियोजनाओं की रफ्तार बनी रहे।
माकपा की केंद्रीय समिति में प. बंगाल के एक वरिष्ठ सदस्य के अनुसार, परमाणु करार के मुद्दे पर पार्टी महासचिव प्रकाश करात की दृढ़ता के कारण राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं के मन में सवाल उठने लगे हैं। इसमें सबसे अहम सवाल यह है कि केंद्र के साथ तल्खी के बाद क्या राज्य सरकार यहां चल रही मेगा परियोजनाओं को पूरा करवा पाने में सक्षम हो सकेगी।
सर्वमान्य छवि :
इस सदस्य ने बताया कि, ‘भट्टाचार्य की छवि पार्टी लाइन से हटकर राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है, जिससे हमें विश्वास है कि वे राज्य में औद्योगीकरण की गति को बनाए रखने के लिए अधिकतम संभव और जरूरी सहयोग प्राप्त कर सकेंगे।’
बसु का विकल्प :
समिति के एक अन्य सदस्य ने बताया कि पहले पार्टी के वयोवृद्ध नेता ज्योति बसु ही केंद्र और राज्य सरकार के बीच सेतु का काम करते थे, लेकिन उनके गिरते स्वास्थ्य के कारण अब भट्टाचार्य को ये जिम्मेदारी सौंप दी गई है।