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ऐसे हुआ रेफरल का उपयोग

कोलंबो. श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान भारत के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में प्रयोग के तौर पर शुरू किये गए रेफरल सिस्टम के जरिए आज अंपायर के निर्णय को चुनौती देकर आउट होने से बचने वाले पहले बल्लेबाज बन गए।

दिलशान ने पहले टेस्ट के दूसरे दिन जहीर खान की ऑफ स्टम्प से बाहर जाती हुई एक गेंद पर विकेट के पीछे कैच आउट दिए जाने के अंपायर के फैसले को चुनौती देकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया। वह रेफरल सिस्टम के जरिए अंपायर के निर्णय को चुनौती देने वाले पहले बल्लेबाज बन गए। संयोग से दिलशान को उन्हीं अम्पायर मार्क बेंसन ने आउट दिया था जो इस वर्ष की शुरुआत में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए सिडनी टेस्ट में विवादास्पद फैसले देकर सुíखयों में आए थे। उस मैच में भारत की हार के लिए बेंसन और स्टीव बकनर की घटिया अम्पाय¨रग ने भी अहम भूमिका अदा की थी।

दूसरे दिन के अंतिम सत्न में दिलशान ने जहीर की एक गेंद को कवर में खेलने की कोशिश की मगर उनका बल्ला गेंद को स्पर्श किए बगैर जमीन से टकराया जिसकी आवाज सुनकर अम्पायर बेंसन ने उंगली उठा दी। असंतुष्ट दिलशान ने इस निर्णय को रेफरल सिस्टम के जरिए चुनौती दी और तीसरे अंपायर रूडी कुएत्र्जन ने उन्हें नाट आउट करार दिया।

वैसे टेस्ट इतिहास में पहला रेफरल श्रीलंकाई पारी के ४६वें ओवर में किया गया। ऑफ स्पिनर हरभजन ¨सह की गेंद पर म¨लडा वर्णापुरा के खिलाफ अपील को अंपायर बेंसन द्वारा ठुकराए जाने पर कप्तान अनिल कुंबले ने इस निर्णय को तीसरे अंपायर को रेफर किया। तीसरे अंपायर कुएत्र्जन ने बेंसन के फैसले से सहमति जताते हुए वर्णापुरा को नाट आउट माना।

इसके अलावा दिन के आखिरी तथा पारी के १२क्वें ओवर में हरभजन की ही गेंद पर स्वीप शॉट खेलने की कोशिश करने वाले दिलशान के खिलाफ पगबाधा की जोरदार अपील को ठुकराए जाने के निर्णय को एक बार फिर रेफर किया गया और इसका नतीजा भी बल्लेबाज के पक्ष में ही रहा।





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