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लखनऊ .
आगरा में शिव सैनिकों के एक समूह ने सावन के महीने में ताजमहल के अंदर पूजा करने का दावा कर विवाद गरमा दिया है। हालांकि प्रशासन ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है।
शिव सैनिक और दूसरे कुछ संगठन लंबे समय से दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल को शिव मंदिर बताते रहे हैं। इनका दावा है कि मुगलों ने तेजोमहालय शिवमंदिर को तोड़कर ताजमहल बना दिया था, जबकि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया इनके दावे को नकारता रहा है। प्रशासन का कहना है कि शिव सैनिकों ने बुधवार को ताजमहल के पीछे पूजा का प्रयास किया था, जिसे रोक दिया गया।
सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के सब इंस्पेक्टर आरके दीक्षित ने कहा कि शिवसेना की आगरा इकाई के अध्यक्ष बीनू लवानिया के नेतृत्व में गुरुवार शाम आए लोगों की तलाशी ली गई थी। उनके पास मिले अनावश्यक सामान को काउंटर पर जमा करा दिया गया था। उन्होंने ताजमहल में कोई पूजा नहीं की है। मामले को मीडिया ने तूल दिया है।
सुरक्षा को धता :
ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में दर्जनभर शिव सैनिकों ने करीब साढ़े चार बजे ताजमहल में कड़ी सुरक्षा के बीच प्रवेश किया और शिव चालीसा का पाठ किया। लवानिया ने कहा कि यदि मंदिर में पूजा करना अपराध है तो वे यह अपराध बार-बार करेंगे।
अमरनाथ का जवाब :
उन्होंने कहा कि उनका यह कदम अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन देकर वापस ले लेने का जवाब है। शिव सैनिकों ने कहा है कि वे सावन माह के हर सोमवार को ताजमहल में पूजा करना जारी रखेंगे।
‘ताजमहल के अंदर कोई पूजा नहीं हुई है।’
- डीजीपी, उत्तरप्रदेश
‘ताजमहल की सुरक्षा पुख्ता है। परिसर के अंदर किसी भी तरह की पूजा नहीं की गई है।’
- वीएस पांडेय, प्रमुख सचिव