मुंबई.दोस्तों की प्रेरणा से अंगदान करने का रतिलाल शाह का फैसला उनकी मौत के बाद अब पांच लोगों को नई जिंदगी देने का सबब बन सकता है। रतिलाल ने 18 जुलाई को मरने से पहले अपनी आंखें और त्वचा दान कर दी थीं। उनकी इस इच्छा को बेटे भावेश (33) और पत्नी कोकिला ने मिलकर पूरा किया। दिवंगत रतिलाल की आंखें मुंबई स्थित केजे सोमैया अस्पताल के दो मरीजों को प्रत्यारोपित की जाएंगी। इसी तरह सियोन अस्पताल के स्किन बैंक द्वारा ग्रहण की गई उनकी त्वचा अब आग से झुलसे लोगों की जीवनरक्षा के काम आएगी।
पक्षाघात से थे पीड़ित
आंशिक पक्षाघात के कारण दो साल पहले रतिलाल के शरीर के बाएं हिस्से ने काम करना पूरी तरह से बंद कर दिया था। कुछ दिन पहले न्यूमोनिया की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाया गया था, जहां फेफड़ों के नाकाम होने के कारण 64 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई थी।
बढ़ रही है जागरूकता स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं के समूह ‘संडे फ्रेंड्स’ के अनुसार, अंगदान के प्रति जागरुकता बढ़ने के कारण इस वर्ष अब तक 23 लोगों ने अपनी त्वचा दान की है। पिछले साल 51 लोगों ने त्वचा दान की थी।’
क्या है स्किन बैंकिंग
मरने के बाद स्किन बैंक में व्यक्ति की जांघ और पीठ की ऊपरी त्वचा निकाल ली जाती है। इस त्वचा को जीवाणुरहित बोतल में रख दिया जाता है। इसके बाद माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा इसकी प्रोसेसिंग की जाती है। दान की गई त्वचा को शून्य से 70 डिग्री नीचे के तापमान पर छह महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है।