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सिर्फ पोलियो ड्राप नहीं, इंजेक्शन भी जरूरी

मुंबई.देश में पोलियो उन्मूलन के लिए अलग-अलग तीन चरणों में कार्यक्रम चलाए जाने के बावजूद आज भी पोलियो के सैकड़ों मामले मौजूद हैं। इसके लिए विशेषज्ञों ने बच्चों को दिए जाने वाले पोलियो ड्राप (ओपीवी, ओरल पोलियो वैक्सीन) की क्षमता पर सवाल उठाया है। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि पोलियो वैक्सीन के साथ ही पोलियो वैक्सीन का इंजेक्शन देना भी जरूरी है।

गौरतलब है कि 2008 तक देश से पोलियो पूरी तरह समाप्त करने की योजना के बाद भी सिर्फ इस साल जून तक इसके 290 मामले सामने आ चुके हैं। इसी संबंध में हाल ही में केंद्र सरकार के कुछ सलाहकार और चिकित्सा विशेषज्ञों ने यह विचार व्यक्त किया कि बच्चों को ओपीवी देकर पोलियो वायरस को फैलने से तो रोक जा सका है, लेकिन वैक्सीन में इसके वायरस को समाप्त करने की क्षमता का अभाव है।

दो साल और लगेगा उन्मूलन में : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के भारतीय विशेषज्ञ सलाहकार दल के अध्यक्ष डॉ टी. जैबक जॉन के मुताबिक, ‘पूरी तरह से पोलियो समाप्त करने का उपाय सिर्फ ये है कि ओपीवी के साथ ही इनएक्टीवेटेड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) दिया जाए, या फिर पोलियो ड्राप की जगह इसका इंजेक्शन दिया जाए।’ वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ओपीवी के इस्तेमाल से पोलियो उन्मूलन करने में अभी दो साल और लगेंगे।

प्रतिरोधक क्षमता घटी :

सरकार के सिर्फ एक वैक्सीन के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे बच्चों में सिर्फ पहली और तीसरी श्रेणी के पोलियो के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। राष्ट्रीय पोलियो निगरानी कार्यक्रम के सलाहकार समिति (एनपीएसपी) के सदस्य डॉ नवीन ठक्कर कहते हैं, ‘बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में गैप आ गया, क्योंकि उन्हें 2005 से पी 3 प्रतिरोधक वैक्सीन नहीं दिया गया है। ’ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को आईपीवी लगवाया जाता तो यह नौबत नहीं आती।

राजनीतिक निर्णय का खामियाजा :

राष्ट्रीय पोलियो प्रतिरोधक कार्यक्रम के उप सलाहकार जैकब जॉन के मुताबिक, सरकार की तकनीकी समिति ने भी पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम में आईपीवी के लिए कई बार सलाह दी थी। जॉन ने बताया कि जब सरकार को लगा कि इससे पोलियो पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता है, तो उसने पोलियो के कई डोज देना शुरू कर दिए।

विशेषज्ञों का कहना है :

ø देश में अभी तक पहली श्रेणी के पोलियो (पी-1) को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

ø पी-1 पोलियो के वायरस बहुत तेजी से फैलते हैं। इससे हर 200 में से एक बच्च लकवाग्रस्त हो जाता है। वहीं, पी-3 वायरस से 800 से 1000 में एक बच्चे को लकवे का खतरा होता है।

ø इस साल आठ से दस राज्यों में पोलियो के 290 मामलों में सिर्फ पांच ही पी-1 श्रेणी के हैं, जबकि शेष पी-3 श्रेणी के ।

ø एचआईवी एड्स ग्रस्त बच्चों में पोलियो ड्रॉप कारगर नहीं हैं।

ø 2008-09 के केंद्रीय बजट में पोलियो उन्मूलन के लिए 1,042 करोड़ रुपए आवंटित।

ø अमेरिका सहित यूरोपीय देशों में पोलियो उन्मूलन के लिए ओपीवी के साथ आईपीवी का प्रयोग।

2005 में भारत पोलियो उन्मूलन के लगभग करीब था। इस दौरान पोलियो के सिर्फ 66 मामले पाए गए थे, लेकिन अगले दो साल में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ गया।

पोलियो की स्थिति :

2003 — 225 2004 — 143 2005 — 66 2006— 873 2008 — 290 (जून तक)





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