कोलंबो.
मुथैया मुरलीधरन और अजांथा मेंडिस की तांडव करती गेंदों में टीम इंडिया के धुरंधर शेर बुरी तरह से उलझते गए और फॉलोऑन की त्रासदी झेलकर श्रीलंका के खिलाफ पहला टेस्ट एक पारी और 239 रनों के विशाल अंतर से हार बैठे। सिंहलीज मैदान की विकेट पर 4 शतकों की मदद से बने श्रीलंका के 600 रनों के स्कोर को भारतीय बल्लेबाज दोनों पारियों में मिलकर भी नहीं बना पाए और पहली पारी में 223 और दूसरी पारी में केवल 138 रनों पर मुरली और मेंडिस के आगे चौथे दिन ही घुटने टेक बैठे।
मैच का पहला दिन बारिश की भेंट चढ़ गया था और श्रीलंका ने 22 ओवर के खेल में 2 विकेट गंवाकर 85 रन एकत्र किए थे। दूसरे दिन वर्णपुरा (115), कप्तान जयवर्धने (136) और समरवीरा (127) के शतकों की बदौलत श्रीलंका 400 रनों के पार हुआ और तीसरे दिलशान (125 नाबाद) के शतक की मदद से 600 रनों पर पहुंचकर पारी घोषित कर मात्र 159 रनों पर भारत के 6 विकेट झपटकर मैच जीतने के इरादे जाहिर कर डाले।
चौथे दिन लक्ष्मण (56) की मदद से भारत 223 रन जोड़ सका लेकिन फॉलोऑन के भंवरजाल में फंस गया। फॉलोऑन में फंसकर भी भारतीय बल्लेबाज टिकाऊ बल्लेबाजी करने में विफल रहे और मुरली की मैजिक और मेंडिस की रहस्यमयी गेंदों पर ता-ता-थैया करते हुए मात्र 138 रनों के स्कोर पर पेवेलियन जा पहुंचे।
दूसरी पारी में मुरली ने 26 रन देकर 6 और मेंडिस ने 60 रन देकर 4 विकेट लिए। मैच की दोनों पारियों में मुरली ने 110 रन देकर कुल 11 और मेंडिस ने 132 रन देकर 8 विकेट लिए। मेंडिस ने अपने पदार्पण टेस्ट में कमाल की गेंदबाजी की और राहुल द्रविड़ जैसे धुरंधर बल्लेबाज का दोनों पारियों में आउट किया लेकिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर का विकेट इस टेस्ट में शायद उनकी किस्मत में नहीं था।
श्रीलंका के पहली पारी में बने 600 रनों के विशाल स्कोर के आगे भारतीय बल्लेबाज तीसरे दिन 159 रनों पर 6 विकेट गंवाकर फॉलोऑन खेलने का मन बना चुके थे। आज चौथे दिन लक्ष्मण ने एक छोर से मुरली और मेंडिस से जबरदस्त किला लड़ाया लेकिन उन्हें अपने सहयोगी बल्लेबाजों से दूसरे छोर से मदद नहीं मिली। कुंबले (1) और जहीर खान (5) को मेंडिस ने अपना शिकार बनाकर दिन की अच्छी शुरुआत की। हरभजन (9) को मुरली ने चलता किया। लक्ष्मण ने ईशांत शर्मा के साथ अंतिम विकेट के लिए 35 रन जोड़कर भारतीय स्कोर को 200 के पार लगाया।
लक्ष्मण 118 गेंदों पर 6 चौकों की मदद से 56 रनों पारी खेलकर मेंडिस के शिकार हुए और भारतीय पारी 223 रनों पर खत्म होकर टीम फालोऑन खेलने को विवश हुई। ईशांत 13 रनों पर नाबाद रहे। मेंडिस ने 72 रन देकर 4 तथा मुरली ने 84 रन देकर 5 विकेट लिए। कुलशेखरा को एक विकेट से संतोष करना पड़ा। 377 रनों से पीछे होकर भारत ने अपनी दूसरी पारी शुरू की। पहली पारी की तरह लापरवाहीपूर्ण प्रदर्शन का सिलसिला दूसरी पारी में भी बरकरार रहा और मुरली-मेंडिस ने अपना तांडव शुरू कर दिया।
ओपनर गौतम गंभीर (43) ने श्रीलंकाई गेंदबाजों से संघर्ष किया लेकिन दूसरे छोर से टीम इंडिया के धुरंधर तू-चल-मैं-आया की तर्ज पर अपने विकेट थ्रो करते गए। सहवाग (13), सचिन (12), गांगुली (4), कार्तिक (0), कुम्बले (12) तथा गंभीर (43) मुरली की धुन पर मंत्रमुग्ध हुए औैर लक्ष्मण (21), द्रविड़ (10), हरभजनसिंह (15) तथा जहीर खान (3) मेंडिस की अनबुझी गेंदों में उलझ बैठे। गंभीर ने 126 मिनट तक क्रीज पर रहे और 90 गेंदों का सामना कर 4 चौकों की मदद से 43 रन बनाने में कामयाब हुए।
टीम इंडिया की तीसरी बड़ी हार
एक पारी और 239 रन की हार भारत की तीसरी सबसे बड़ी हार है। इससे पहले १९५८ में वेस्टइंडीज ने कोलकाता में भारत को पारी और ३३६ रन से हराया था। १९७४ में इंग्लैंड ने लार्डस में पारी और ८५ रन से जीत हासिल की थी।
श्रीलंका की तीसरी बड़ी जीत
श्रीलंका ने अपने टेस्ट इतिहास की तीसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की। श्रीलंका ने मई २क्क्४ में जिम्बाब्वे को पारी और २५४ रन से हराया था। यह उसके टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी जीत है। इसके पहले श्रीलंका की भारत पर सबसे बड़ी जीत पारी और ७७ रन की थी। उसने इस अंतर से अगस्त २क्क्१ में भारत को हराया था।
र्ट्िनग प्वॉइंट
टेस्ट मैच में 34 साल बाद भारत को मिली इतनी बड़ी हार के लिए बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों को दोष दिया जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि इस मैच के र्ट्िनग प्वॉइंट क्या रहे।
>> श्रीलंका के दोनों स्पिनर्स (मुरली और मेंडिस) ने कमाल किया, लेकिन भारत के अनिल कुंबले और हरभजन सिंह नहीं दिखा पाए कोई जादू।
>> भारत के तीनों दिग्गजों (सचिन, द्रविड़ और गांगुली) नहीं छोड़ी कोई छाप। ओपनिंग जोड़ी भी रही नाकामयाब।
>> मैच में छह रेफरल के फैसले गए भारत के खिलाफ। दूसरी पारी में सचिन, सहवाग और द्रविड़ आउट हुए रेफरल सिस्टम के तहत।
यूं गिरे भारतीय
भारत (दूसरी पारी)वीरेंद्र सहवाग : लेग स्टंप पर पिच हुई गेंद पैड से उलझी। राउंड द विकेट गेंदबाजी कर रहे मुरली की एलबीडब्ल्यू की अपील को अंपायर ने नकारा। ‘नॉट आउट’ को चुनौती मिलने पर थर्ड अंपायर ने आउट का निर्णय दिया।
वीवीएस लक्ष्मण : मिडिल स्टंप पर पिच हुई गेंद पिछले पैड से टकराई, विकेट के सामने पकड़े गए।
सचिन : लेग स्टंप से बाहर पिच हुई ‘दूसरा’ पर स्वीप शॉट खेलने गए। बैट का किनारा लेकर गेंद को लेग स्लिप पर दिलशान ने लपका। ‘नॉट आउट’ के निर्णय को चुनौती मिलने पर थर्ड अंपायर ने आउट करार दिया।
गौतम गंभीर : फ्लाइटेड गेंद को एक्स्ट्रा कवर में खेलने की कोशिश, एज विकेटकीपर के ग्लव्स में समाई।
सौरव गांगुली : तेजी से टर्न होती गेंद पर बल्ला अड़ाया, दूसरी स्लिप पर लपके गए।
राहुल द्रविड़ : डिफेंसिव शॉट खेलने गए। इन साइड एज, शार्ट लेग पर लपके गए। ‘नॉट आउट’ के निर्णय को चुनौती मिलने पर थर्ड अंपायर ने आउट दिया।
दिनेश कार्तिक : राउंड द विकेट गेंदबाजी करते हुए मुरली ने दूसरा फेंका, कार्तिक ने बल्ला अड़ाया, पहली स्लिप पर लपके गए।
अनिल कुंबले : राउंड द विकेट गेंदबाजी करने वाले मुरली की फास्टर ऑफ ब्रेक ने गिल्लियां बिखेरीं।
जहीर खान : मिडिल स्टंप पर पिच हुई गुगली पर जहीर असहाय, गिल्लियां बिखरीं।
हरभजन सिंह : मिडिल स्टंप पर पिच हुई गेंद पर हवाई शॉट की तलाश में बोल्ड हुए।
मेंडिस बहुत अच्छे स्पिनर हैं, लेकिन मेरे हिसाब से हमारी हार में मुरलीधरन का ज्यादा योगदान है। श्रीलंका के पहली पारी में 600 रन का स्कोर खड़ा करने के बाद हम दबाव में आ गए थे। उस समय हमें लग गया था कि मैच बचाना आसान नहीं रहेगा।अनिल कुंबले, भारतीय कप्तान
मेंडिस बड़े प्यार से गेंद फेंकते हैं और उस समय उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान तैरती रहती है। उनके तरकश में ऑफ ब्रेक, लेग ब्रेक, गुगली, फ्लिपर सभी तरह की गेंदें हैं। वे इन सभी गेंदों को अलग-अलग एक्शन से फेंकते हैं। गेंद की रफ्तार भी अलग होती है, जिससे बल्लेबाज सम्मोहित हो जाता है और अपना विकेट गंवा बैठता है।
टोनी बेका
मैंने अभी-अभी स्पिन गेंदबाजी के भविष्य को देखा और उसका नाम है-अजंता मेंडिस।
रॉब स्टीन, क्रिकेट विशेषज्ञ
मेंडिस कुछ खास हैं। मौका मिलने पर मैंने सीनियर और जूनियर सभी को इसकी जानकारी दी।
महेला जयवर्धने, श्रीलंकाई कप्तान
अगर मुझे पता होता तो, मेंडिस की विविधतापर्ण गेंदबाजी के बारे में मैं आपको जरूर जानकारी देता।
ट्रेवर बाइलिस, श्रीलंका कोच