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अमृतसर. एटमी करार की खुलकर वकालत करते हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा कि इससे हम दस गुना ज्यादा एनर्जी जनरेट कर सकते हैं। ये भारत को स्मार्ट कंट्री के रूप में विकसित करने में काफी मददगार साबित होगा।
सुल्तानपुर लोधी के ‘भगीरथ’ संत बलबीर सिंह सींचेवाल से मिलने के लिए पंजाब आए डा. कलाम ने अमृतसर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विकास के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी है। इस समय हमारे पास यूरेनियम बेस न्यूक्लियर रिएक्टर हैं।
वैज्ञानिक थोरियम को भी विकल्प के रूप में पेश करते हैं, जो काफी मात्रा में भारत में उपलब्ध है, लेकिन इसके इस्तेमाल में भारत को कम से कम छह-सात साल लगेंगे और भारत इतना इंतजार करके खुद को एक स्मार्ट कंट्री के रूप में साबित नहीं कर पाएगा।
पर्यावरण की दृष्टि से भी करार काफी फायदेमंद है। यूरेनियम से प्रदूषण की आशंका बिल्कुल ही नहीं है। आज अगर हम 120 मैगावाट बिजली जनरेट करते हैं तो इसके बाद हम 1000 मैगावाट से अधिक बिजली जेनरेट करने के काबिल होंगे।
शर्र्तो पर काफी कुछ निर्भर
करार के विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये एक पैक्ट है, इसमें काफी कुछ यूरेनियम के बदले रखी गई शर्ताें पर निर्भर करता है और इसका ख्याल रखना सरकार का काम है। अगर शर्ताें में गड़बड़ी दिखती है तो सरकार अपना फैसला वापस ले सकती है।
70 प्रतिशत राजनीति केवल सत्ता के लिए
आज केवल 30 फीसदी राजनेता विकास के लिए राजनीति करते हैं, जबकि 70 फीसदी केवल सत्ता के लिए राजनीति करते हैं। हमें इस औसत को बदलना है और विकास की राजनीति 70 तक करना है। इसके लिए हम सबको अपने वोट के इस्तेमाल का महत्व समझना होगा।
राहुल ने भी लिया गुरु मंत्र!
एटमी करार के समर्थन में राहुल गांधी के संसद में दिए गए तर्र्को और कलाम की बातों में काफी एकरूपता पर जब उनसे पूछा गया कि क्या राहुल ने भी आपसे इस बारे में पूछा था? उन्होंने कहा कि इस मसले पर 50-60 लोगों ने उनसे बातचीत की। अब उन्हें ये याद नहीं कि उनमें कौन-कौन शामिल हैं। समाजवादी पार्टी के उनके ही कहने पर सरकार को समर्थन की बात पर उन्होंने कहा कि एटमी करार का समर्थन वे करते हैं, लेकिन इसपर किसने किसको समर्थन किया, इससे उन्हें ज्यादा मतलब नहीं है।