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बहादुरगढ़.
रविवार को जब देश भर के बच्चे अपने माता-पिता के साथ पैरेंट्स-डे मना रहे थे, वहीं सरिता के दो मासूम बच्चे अनाथालय में अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे थे। इन बच्चों को दो दिन पहले ही उसके पिता ने अनाथालय में छोड़ दिया था। बता दें कि दुष्कर्म का शिकार सरिता ने न्याय न मिलने पर पुलिस मुख्यालय में जहर खाकर जान दे दी थी।
जब सरिता जिंदा थी तो सुभाष बच्चों को खूब प्यार करता था, लेकिन सरिता की मौत के बाद जैसे बच्चे उसके लिए बोझ बन गए। उसने हिना (6) और मुस्कार (ढाई) को यहां के सेक्टर-6 में बाल भवन द्वारा संचालित अनाथालय में छोड़ दिया। हालांकि बच्चों से पल्ला झाड़ने के पीछे सुभाष गरीबी का रोना रोता है।
गौरतलब है कि सरिता की मौत के बाद सरकार की ओर से उसे आर्थिक सहायता के अलावा इन बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई का लिखित आश्वासन भी मिला था। मुस्कान को मम्मी की बजाए पापा की अधिक याद आती है। अब अनाथालय में उसके आंसू थम नहीं रहे।
अनाथालय की अधीक्षक सरोज सांगवान ने कहा कि सुभाष दो दिन पूर्व बच्चों को लेकर आया था। सुभाष को अनाथालय के स्टाफ ने काफी समझाया कि बच्चों की परवरिश वह खुद करे, लेकिन वह नहीं माना। कभी गरीबी, तो कभी बच्चों का बोझ उठाने की असमर्थता बताकर वह दोनों को यहां छोड़ गया।
बाल भवन के स्टाफ ने रोहतक के डीसी आरएस दून के आदेश पर बच्चों को रखा है। सुभाष ने रोहतक प्रशासन से बच्चों को अनाथालय में पालने की बात कही थी, जो मंजूर कर ली गई।