मुंबई.
आईसीएल के दिनेश मोंगिया के साथ खेलने के कारण मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर पर भी ऊंगली उठने लगी है। कहा यह जा रहा है कि उन्हें सजा मिलनी चाहिए लेकिन कुछ लोगों का मत है कि वे ब्रायन लारा के सर्वाधिक रनों के विश्व कीर्तिमान तोड़ने के करीब हैं इसलिए सजा नहीं मिलनी चाहिए। सचिन इंग्लैंड में स्कूली बच्चों की बेहतरी के लिए धन संग्रह के उद्देश्य से लेसिंग क्लब की ओर से तीन चैरिटी मैचों में खेले थे।
इस क्लब से आईसीएल से अनुबंधित खिलाड़ी दिनेश मोंगिया भी खेले थे। एक मैच में मोंगिया व सचिन ने पारी भी ओपन की थी। बीसीसीआई के पसोपेश में होने की वजह यह है कि उसने वीवीएस लक्ष्मण, अजीत आगरकर व पीयूष चावला को इसलिए काउंटी में नहीं खेलने दिया क्योंकि उसमें आईसीएल से जुड़े खिलाड़ी खेल रहे हैं। अत: सचिन के आईसीएल के खिलाड़ी के साथ खेलने पर कैसे बख्शा जा सकता है। कयास लगाया जा रहा है कि सचिन को श्रीलंका सीरीज समाप्त होने के बाद कुछ टेस्ट व वनडे मैचों पर प्रतिबंध के रूप में सजा हो सकती है।
वैसे बीसीसीआई की एक लॉबी चैरिटी मैच का हवाला देकर सचिन को बख्शना चाहती है लेकिन इससे बीसीसीआई की छवि धूमिल हो सकती है।
सचिन को पता था फिर भी खेले
यह बात नहीं है कि सचिन ने गलती से मोंगिया के साथ मैच में भाग लिया। वे यह अच्छी तरह से जानते थे कि यह मामला तूल पकड़ सकता है, लेकिन उन्होंने अपनी टीम के पुराने साथी ( दिनेश मोंगिया) का दिल तोड़ने से बेहतर बीसीसीआई से पंगा लेना उचित समझा होगा।
सचिन पर आरोप गलत
लेसिंग्स क्लब के चेयरमैन डेविड फोब को जब लंदन में पता चला कि उनके क्लब से खेलने पर सचिन मुसीबत में फंस गए हैं तो उन्हें गहरा आघात पहुंचा। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सचिन पर आरोप लगाना उचित नहीं है। सचिन स्कूली बच्चों के साथ चैरिटी के लिए खेले थे तथा उन्होंने हमसे कोई धनराशि नहीं ली। भला आजकल ऐसा कौन करता है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि बीसीसीआई सही तथ्यों को जुटाने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचेगी।