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जिन्हें आतंकी समझा ठग निकले

उदयपुर. अहमदाबाद में सीरियल बम ब्लास्ट के बाद उदयपुर में दो संदिग्ध युवकों के पकड़े जाने से राजस्थान और गुजरात के खुफिया विभाग की अच्छी खासी भागदौड़ हो गई। उनके पास मिले पाउडर से दोनों पर आतंकवादी होने का शक हो गया था।

पुलिस के मुताबिक जांच में केमिकल खतरनाक नहीं पाया गया, मगर पुलिस ने यह भी खुलासा नहीं किया कि केमिकल किस तरह का है और उसका उपयोग क्या है।

पुलिस के अनुसार दोनों संदिग्ध जादू और टोना-टोटका कर लोगों को ऐंठने का काम करते हैं। उदयपुर में ‘दो संदिग्ध केमिकल (जो विस्फोटक भी हो सकता है) के साथ पकड़े गए’ शीर्षक से सोमवार को प्रकाशित खबर के बाद पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया।

इससे पहले पुलिस इस बात से भी नकारती रही कि उन्होंने किसी संदिग्ध को हिरासत में लिया है। खबर में बताया गया था कि केमिकल क्या है, इसका पता फोरेंसिक जांच के बाद ही चलेगा। पुलिस के अनुसार अहमदाबाद में हुए सीरियल बम ब्लास्ट की घटना के बाद शनिवार शाम को सूरजपोल क्षेत्र में संदिग्ध हालात में घूमते गाजियाबाद निवासी इमरान पुत्र लियाकत अली व मुजफ्फरपुर निवासी अरशद पुत्र मोहम्मद अली को हिरासत में लिया।

जांच में उनके पास पाउडर से पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस को उम्मीद थी कि इनसे अहमदाबाद में हुए विस्फोट की घटना का सुराग लग सकता है।

यह लोग अलग-अलग शहरों में जाकर होटलों में कमरे किराए लेते हैं। दोनों अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करते हैं, जिसमें प्रेम व केरियर में असफल युवक-युवतियों की समस्याओं का समाधान करने का झांसा दिया जाता है। पूछताछ में इन दोनों से मिली जानकारियों की तस्दीक करने के लिए पुलिस ने कुछ दल बाहर भेजे हैं।

यह लोग संदिग्धावस्था में घूम रहे थे। इन्हें सूरजपोल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये लोग अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कर प्रेम व कॅरियर में असफल युवक-युवितयों को ठगने का कार्य करते हैं। इन लोगों से एक पाउडर बरामद हुआ है, जो जांच में घातक नहीं पाया गया है।
-राजेंद्र प्रसाद गोयल, एएसपी, सिटी





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