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सीमा विस्तार बिन नैया पार

अजमेर. नगर निगम का दर्जा देने के लिए आवश्यक जनसंख्या जुटाने को लेकर शहर की सीमा विस्तार के मामले में प्रशासन हर बार हौच-पौच रहा है। पहले 18 और फिर 14 गांवों को शामिल करने का फैसला विरोध के चलते वापस लिया गया।

अब तीसरी बार कलेक्टर की सदारत में बनी कमेटी सीमा भी तय नहीं कर सकी है। इस बीच सीएम की फटकार के बाद आनन-फानन में निगम की घोषणा करनी पड़ी है। माना जा रहा है कि सरकार ने इस बार शहर की सीमा का बगैर कोई विस्तार करे परिषद को जस का तस निगम बना दिया है।

निगम के लिए शहर की सीमा विस्तार के मद्देनजर सरकार की मांग पर तत्कालीन सीईओ अंबरीश कुमार ने शहर के पेराफेरी क्षेत्र के 18 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था, जिस पर राज्य स्तर पर 22 जनवरी को वित्त सचिव, स्वायत्त शासन सचिव तथा अन्य विभागों की बैठक हुई थी। डीएलबी ने सभी 18 गांवों को शामिल करने की अधिसूचना जारी कर दी।

अधिसूचना रोकी
राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान 25 अगस्त को अशोक उद्यान में एसएचजी महिलाओं की सभा को संबोधित करते हुए सीएम वसुंधरा राजे ने शहर को निगम का दर्जा देने तथा पुष्कर विकास बोर्ड पुनर्जीवित करने की घोषणा की थी। सीएम को जब यह पता चला कि पेराफेरी के गांव निगम में शामिल नहीं होना चाहते, तो उन्होंने कहा कि गांवों की राय के आधार पर ही उन्हें शामिल या बाहर रखा जाएगा।

फिर भेजा प्रस्ताव
पूर्व में प्रस्तावित कुल 18 गांवों के पंचायती राज प्रतिनिधियों ने निगम सीमा में शामिल करने का विरोध शुरू किया, तो नए प्रस्ताव में केवल दो गांव माकड़वाली व नारेली को निगम सीमा से बाहर रखते हुए कलेक्टर नवीन महाजन ने 13 मई को सरकार को फिर प्रस्ताव भेज दिया। हैरत की बात यह है कि सीमा के बाहर रखने का फैसला प्रशासन ने महज इस आधार पर किया है कि इन दोनों गांवों के लोगों ने कलेक्ट्रेट के सामने विरोध प्रदर्शन किया था।

नए प्रस्ताव में ये गांव शामिल
नए प्रस्ताव के अनुसार निगम सीमा में जिन गांवों को शामिल किया गया है, उनमें लोहागल, कायड़, भूणाबाय-कांकरदा, घूघरा, रसूलपुरा, मदारपुरा, सेदरिया, सोमलपुर, बोराज-काजीपुरा, हाथीखेड़ा, किरानीपुरा, बड़गांव, दौराई तथा तबीजी शामिल हैं।

अब आए नतीजे
अजमेर यात्रा के दौरान 19 जुलाई को सीएम को जब निगम की घोषणा याद दिलाई गई, तो उन्होंने फिर से पहल की। इस पर स्वायत्त शासन मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने परिषद की सीमा को ही निगम की सीमा मानते हुए सीएम को प्रस्ताव भेज दिया और सीएम ने मंजूरी दे दी। कलेक्टर की शहर सीमा विस्तार की कवायद एक बार फिर धरी रह गई।

ये गांव थे शामिल
तहसील से प्राप्त समीपस्थ गांवों की राजस्व सर्वे रिपोर्ट के बाद परिषद के तत्कालीन सीईओ अंबरीश कुमार ने 18 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा था, जिनमें माकड़वाली, लोहागल, कायड़, भूणाबाय, कांकरदा, घूघरा, रसूलपुरा, नारेली, मदारपुरा, सेदरिया, सोमलपुर, बोराज, काजीपुरा, हाथीखेड़ा, किरानीपुरा, बड़गांव, तबीजी तथा दौराई शामिल हैं।

राजस्व सर्वे के मुताबिक इन गांवों की आबादी लगभग पचास हजार है। उल्लेखनीय है कि सन 2001 की जनगणना के मुताबिक परिषद क्षेत्र की जनसंख्या 4.87 लाख थी। निगम के लिए पांच लाख की आबादी होना आवश्यक थी।

विरोध में प्रस्ताव पारित
जिला परिषद की साधारण सभा में भास्कर के 27 मई के अंक में ‘बिना राय, भेजा प्रस्ताव’ शीर्षक से छपी खबर को आधार मान कर सदस्य श्रवण सिंह रावत ने प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध किया था। उनका कहना था कि सीएम ने इस संबंध में तत्कालीन नगरीय विकास मंत्री को सभी गांवों को बाहर रखने के आदेश दिए थे।

पंचायती राज प्रतिनिधियों का विरोध देखते हुए 1 जून को कलेक्टर नवीन महाजन को एडीएम प्रशासन केके शर्मा की अगुवाई में कमेटी का गठन करना पड़ा। कमेटी की 4 जुलाई को बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन उर्स के कारण टाल दी गई।





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