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उदयपुर. सार्वजनिक स्थलों पर बम ब्लास्ट और जनहानि को देखते हुए लेकसिटी का केंद्रीय बस स्टैंड सुरक्षा के नजरिए से महफूज नहीं कहा जा सकता। बस स्टैंड की सुरक्षा महज दो जवानों के भरोसे है और वे भी शस्त्र विहीन है।
बस स्टैंड से 6000 यात्री रोजाना 123 बसों में विभिन्न स्थानों के लिए सफर करते है, ऐसे में बस स्टैंड पर यात्रियों और उनको छोड़ने आने वाले लोगों की संख्या रोजाना करीब 9000 हो जाती है। बस स्टैंड पर सुरक्षा के इंतजामों के अभाव में किसी भी हादसे, अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
आगार के अधिकारी और कर्मचारियों का कहना है कि बस स्टैंड सार्वजनिक स्थल है, यहां सैकड़ों की संख्या में लोगों को आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में पुलिस के केवल दो जवानों की नियुक्ति कैसे पर्याप्त हो सकती है?
बस स्टैंड के चारों ओर बनी ब्राउंड्रीवाल भी कम ऊंचाई की है, ऐसे में कोई भी समाज कंटक अपने बुरे इरादों को अंजाम दे सकता है। बस स्टैंड के पीछे गुजर रही रेलवे लाइन के आसपास उगी घनी झाड़ियां वारदात करने वालों के लिए एक बार तो छिपने की जगह बन सकती है।
क्लॉज सर्किट कैमरे का अभाव: बस स्टैंड पर क्लॉज सर्किट का अभाव सुरक्षा की दृष्टि से कम महत्वपूर्ण नहीं है। बसों से जाने और आने वाले यात्रियों में कई यात्री ऐसे भी हो सकते हैं, जो संदिग्ध हो सकते हैं। ऐसे में क्लॉज सर्किट नहीं होने से ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों पर नजर रख पाना मुश्किल ही है।
सुरक्षा की खामियां
>> बस स्टैंड की चौकी पर केवल दो पुलिस जवानों की नियुक्त।
>> हथियार से लैस जवानों का अभाव।
>> ब्राउंड्रीवाल की ऊंचाई बहुत कम।
>> रेलवे लाइन की दिशा में घनी झाड़ियां।
>> क्लॉज सर्किट का अभाव।
>> रात्रि में बस स्टैंड पर सोने वालों का ब्यौरा नहीं, न ही टिकट की जांच।
>> बस स्टैंड के केश भंडार और बैंक के बाहर यात्रियों को सोने की छूट।
>> बस स्टैंड पर मैटल डिटेक्टर का अभाव।
सुरक्षा की जरूरत
>> क्लॉज सर्किट की जरूरत।
>> मैटल डिटेक्टर की सुविधा।
>> जवानों की संख्या बढ़ाते हुए सशस्त्र जवानों की नियुक्ति।
>> ब्राउंड्रीवाल को ऊंचा करना।
>> आसपास खड़े वेंडरों की पुख्ता जानकारी।
>> सोने वाले यात्रियों का रिकार्ड संधारण।
>> आसपास के खाली स्थानों पर उगी झाड़ियों की सफाई।
क्या कहते हैं आगार प्रबंधक
सुरक्षा की दृष्टि से बस स्टैंड में क्लॉज सर्किट जरूरी है। इस कमी को दूर करने के लिए निगम मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा।
- सोहनलाल यादव, आगार मुख्य प्रबंधक