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Shekhawati Shekhawati उदयपुरवाटी. पांव में छाल पड़े हैं, तन-बदन थकान से बुरी तरह टूट रहा है, भूख-प्यास सता रही है। गर्मी से बदन पसीने-पसीने है मगर आस्था की शक्ति ऐसी कि इस सबसे निश्चिंत श्रद्धालु कावड़िये बोल बम, ताड़क बम के जयकारे लगाते हुए दिन-रात चलते रहते हैं।
आधी रात हो या तन जलाने वाली दोपहर नंगे पैर कावड़िये सड़क और उसके किनारे कंकरों, कीकरों के कांटों से बेपरवाह, ना रुकते हैं ना थकते हैं। कंधे पर कावड़ लिए लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते इन कावड़ियों की भक्ति का रंग ही निराला है। इधर कावड़ यात्रियों की सेवा भी इस क्षेत्र में देखते ही बनती हैं।
बिना किसी स्वार्थ के निश्छल भाव से कई धर्मप्रेमी कावड़ियों की सेवा में दिनरात जुटे हैं। सालों से श्रद्धा-सेवा का यह संगम बदस्तूर चला आ रहा है। उदयपुरवाटी क्षेत्र के तीर्थस्थल वाले हर मार्ग पर इन दिनों श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है। श्रावण मास के शुरू होते ही कावड़ में जल भरने का यह सिलसिला इस साल भी पूरे यौवन पर है।
शिवभक्तों की टोलियां : अरावली की पहाड़ियों में लगभग जितने भी तीर्थस्थल है उनका रास्ता वाया उदयपुरवाटी होते हुए ही जाता है। यहां से सीकर, झुंझुनूं, नीमकाथाना व खंडेला की ओर जाने वाले रास्ते से ही ज्यादातर कावड़िये निकलते हैं। इन रास्तों में शुक्रवार से रविवार तक सड़कों पर इतनी अधिक भीड़ हो जाती है कि वाहन चालकों को सावधानी से गाड़ी चलानी पड़ती है।