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International International वाशिंगटन/वियना/तेहरान.पाकिस्तान ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह उसके साथ वैसा ही परमाणु करार करे जैसा कि वह भारत के साथ करने जा रहा है। अमेरिका के दौरे पर गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने इस आशय का आग्रह किया। उन्होंने अमेरिका को यह विश्वास भी दिलाना चाहा कि अब वैज्ञानिक डॉ. ए.क्यू. खान के कार्यकाल के दौरान परमाणु जानकारी लीक होने जैसी घटना नहीं होगी। डॉ. खान को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का संस्थापक माना जाता है।
वियना पहुंचे काकोडकर
भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के चेयरमैन अनिल काकोडकर शुक्रवार को होने वाली आईएईए की अहम बैठक के लिए विएना पहुंच गए हैं। काकोडकर पर यहां आईएईए व एनएसजी में प्रभावी तरीके से भारत का पक्ष रखकर भारत-अमेरिका एटमी डील के लिए दोनों की सहमति पाने की दोहरी जिम्मेदारी होगी। अमेरिका द्वारा एक दिन पहले ही एनएसजी के 45 सदस्यों के नाम जारी खत में परमाणु परीक्षण या सीटीबीटी का जिक्र टाल देने से दिल्ली की चिंताएं कुछ बढ़ गई थीं। एक अगस्त को आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक के बाद भारतीय मांगों को ध्यान में रखकर अमेरिका एनएसजी के सदस्यों के लिए संशोधित खत जारी करेगा। 35 सदस्यीय आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और एनएसजी में करार की मंजूरी के लिए काकोडकर के कई बैठकों में भाग लेने की संभावना है।
इस बात की भी संभावना है कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स भारत केंद्रित उपायों को लेकर एक ‘अतिरिक्त प्रोटोकाल’ पर भी हस्ताक्षर के लिए जोर डाले ताकि उन परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण संभव हो, जिन्हें भारत ने नागरिक क्षेत्र का घोषित कर रखा है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के 22 में से 14 परमाणु संयंत्र आईएईए के निरीक्षण में रहेंगे।
सकारात्मक रुख : इस बीच, तेहरान से मिले समाचार के अनुसार गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन में मौजूद आईएईए और एनएसजी के सदस्य देशों का भारत के अमेरिका के साथ परमाणु करार को लेकर सकारात्मक रुख रहा है। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आईएईए के 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य अल्जीरिया के विदेश मंत्री से इस सिलसिले में बातचीत की। एनएसजी के दो सदस्य देशों साइप्रस और बेलारूस से मुखर्जी पहले ही मुलाकात कर चुके हैं।