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जालंधर. ज्योतिष शास्त्र सूर्य और चंद्र ग्रहण का लगना अशुभ मान रहा है। एक साल में पांच ग्रहण का लगना राजनीतिक उथल-पुथल का कारण माना जा रहा है। अगस्त की एक तारीख को श्रावण अमावस है और इसी दिन खंडग्रास सूर्यग्रहण लगेगा।
ग्रहण देश भर में दिखाई देगा। ग्रहण समाप्ति से पहले ही सूर्यास्त होने के कारण केवल मणिपुर, नगालैंड के पूर्वी भागों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में ग्रहण का मोक्ष नहीं दिखाई देगा।
भारत के शेष अन्य सभी स्थलों पर इसे स्पर्श से मोक्ष (प्रारंभ से समाप्ति) तक खंडग्रास रूप में दिखेगा। ज्योतिषविदों का मानना है कि ग्रहण काल में स्नानादि करके इष्टदेव, भगवान सूर्य की पूजा, पाठ, जपादि करना चाहिए।
पूजा, पाठ, पितृ तपर्ण, वैदिक मंत्रों का अनुष्ठान करना चाहिए। ग्रहण उपरांत अन्न, जल, वस्त्र, फल आदि का दान सुपात्र को देना शुभ होता है। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को सब्जी काटना, पापड़ सेंकाना, उत्तेजित कार्यों से परहेज करना चाहिए तथा धार्मिकग्रंथ का पाठ करते हुए प्रसन्नचित रहें। इससे भावी संतति स्वस्थ एवं सद्गुणी होती है।
ग्रहण से बचाव का उपाय
लखन पड्डा के पंडित तरुण प्रसाद शुक्ला ने कहा कि हनुमान चालीसा या रूद्राष्टक का पाठ करें। गुरु प्रदत गुरु मंत्र का जाप भी लाभकारी है। नारियल व तिल का दान शुभ है। स्वर्ण का दान सवरेत्तम है।
ग्रहण का राशियों पर प्रभाव
मेष: मानसिक परेशानियां त्रस्त करेंगी। भूमि विवाद खड़ा होगा। वृष: भाई-बहन से रिश्तों में खटास बढ़ेगी। बनते कार्य बिगड़ेंगे। मिथुन: कोई पैसा मार सकता है। घरेलू वातावरण तनावपूर्ण होगा। कर्क: सेहत में खराबी व मानसिक तनाव बढ़ेगा। पति पत्नी के रिश्तों में दरार पड़ेगी। सिंह: दुघर्टना के संकेत हैं। दुश्मनों की संख्या में भी वृद्धि होगी। कन्या: आमदनी में कमी होगी। कार्ययोजना विफल होगी। तुला: कोई कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। कारोबारी समस्या आएगी। वृश्चिक: कोई बना बनाया खेल बिगड़ेगा। आगे बढ़ने के मार्ग अवरूद्ध होंगे। धनु: शारीरिक कष्ट परेशान करेंगे। पैसे का ठहराव कम होगा। मकर: वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण होगा। एक दूसरे में सहयोग की भावना कम होगी। कुंभ: शत्रु दबे रहेंगे। आप के नाम का डंका बजेगा। मीन: पेट में गड़बड़ी रहेगी। कोई ऑपरेशन करवाना पड़ सकता है।