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खानापूरी बना अभियान

अजमेर. जिले में शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के अन्तर्गत स्कूली बच्चों की जांच एक खानापूरी बनकर रह गई है। अनेक स्कूलों में पीड़ित बच्चे होने के बावजूद रिपोर्ट में एक भी बच्च रैफरल नहीं किया गया।

इसी प्रकार अभियान में छोटी बीमारियों से ग्रसित बच्चों को दवाईयां स्कूलों में खिलाने का प्रावधान है लेकिन अधिकांश मामलों में विद्यालय स्टॉफ बच्चों को दवाईयां घर ले जाने के लिए दे रहा है। ऐसे में अभियान कहा तक सफल होगा, यह तक समय ही बताएगा। खानापरी बने अभियान पर ‘भास्कर टीम’ की एक रिपोर्ट।

बच्चों को पकड़ा दी दवाइयां, निर्देश का नहीं अता-पता

सारी दवाई एक साथ गटकी
श्रीनगर रोड स्थित राबाउप्रा विद्यालय में 23 व 24 जुलाई को बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई। शाला में कक्षा एक से पांच तक के 112 है। इनमें से सात को रैफर किया गया जबकि कुछ बच्चों को दवाईयां दी गई।

अभियान के अन्तर्गत यह दवाईयां बच्चों को स्कूली में नियमित रूप से खिलाई जानी थी लेकिन स्कूल प्रशासन ने यह दवाईयां बच्चों को घर ले जाने के लिए दे दी लेकिन न तो बच्चे और न ही उनके अभिभावकों को निर्देश दिए।

नतीजतन तीसरी की छात्रा रविना सात दिन की खुराक एक बार में ही गटक गई। उसकी माताजी मीरा देवी ने स्कूल प्राचार्य प्रेमदेवी से भी मामले की शिकायत की। माता मीरा देवी ने कहा कि इनके लेने का तरीका भी बताना चाहिए था।

संक्रमण के बाद भी नहीं किया रेफर
लोहाखान स्थित राबाउप्रा विद्यालय में 21 जुलाई को स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। स्कूली में कक्षा एक से पांच तक के 210 विद्यार्थी है। इनमें से जांच अभियान में एक भी बच्च रैफरल नही मिला।

जांच अभियान की खानापूरी कक्षा तीन के छात्र महेश के मामले में देखने को मिली। छात्र महेश के चेहरे पर संक्रमण है। इस कारण उसके चेहरे पर फुन्सियां व मुस निकल आए हैं लेकिन उसको न तो रैफर किया गया और न ही उसका कोई इलाज किया गया।

बच्चे 232, एक भी रैफरल नही
पुलिस लाइन स्थित राउप्रा विद्यालय में शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान 16 जुलाई को था। स्कूल में कक्षा पांच तक के 232 बच्चे है लेकिन अभियान में एक भी बच्च रैफरल नहीं मिला।

प्राचार्य सत्यनारायण सिंह राठौड़ ने बताया एएनएम ने तो जांच परीक्षण कर लिया लेकिन कोई बच्चा गंभीर बीमार नही मिला। कुछ बच्चे छोटी-मोटी बीमारियों से ग्रस्त थे। उनको दवाईयां वितरित कर दी गई। प्राचार्य के अनुसार अभी मेडिकल ऑफिसर का परीक्षण नहीं हुआ है। इसके बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चलेगा।

अभियान की खानापूरी होने के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीएल फानन से सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।

आंख में परेशानी, नहीं मिली दवाई
लोहाखान स्थित राबाउप्रा विद्यालय में कक्षा एक का छात्र सोनिद आंख की परेशानी से पीडित है लेकिन उसका न तो रैफर किया गया और न ही उसे कोई उपचार दिया गया।

छात्र सोनिद की एक आंख किसी परेशानी के कारण पूरी नहीं खुलती है। ऐसे में छात्र को चिकित्सा की आवश्यकता थी लेकिन वह शाला स्वास्थ्य अभियान की खानापूरी का शिकार होकर इलाज से वंचित रह गया। इस संबंध में प्राचार्य विजयलक्ष्मी शर्मा से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन वे उपलब्ध नही हो सकी।





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