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मारवाड़ जंक्शन के पास दो और बम

पाली. मारवाड़ जंक्शन स्टेशन के नृसिंगपुरा गांव से कुछ दूरी पर बुधवार को दो और बम मिले। इनमें से एक जिंदा बम सड़क से महज पांच फीट की दूरी पर झाड़ियों में पड़ा मिला।

एक बम को डिस्पोजल स्क्वॉयड ने डिफ्यूज कर दिया। दूसरा बम क्षतिग्रस्त था, उसमें भरा बारूद बीडीएस टीम ने नष्ट किया। इलाके में दो दिन के अंतराल में चार जिंदा, एक निष्क्रिय और एक बमनुमा खाली डिब्बा मिलने से दहशत है।

बुधवार को नृसिंगपुरा से करीब दो-तीन सौ फीट दूर गादाणा मार्ग पर झाड़ियों में बम होने की एक व्यक्ति ने पुलिस को जानकारी दी। यह बम भी ऑयल के आधा लीटर वाले डिब्बे में थे। उसमें गन पाउडर, डेटोनेटर, शीशे के र्छे, कांच की गोलियां, सेफ्टिक वॉयर तथा डिब्बे से रस्सी का एक सिरा बाहर निकला हुआ था।

उदयपुर से आया बारुद पाली में बने बम

कन्नू भीलवारा/वीरेंद्र उदेश. पाली
मारवाड़ जंक्शन के पास बुधवार को मिले क्रूड बमों के बारे में जांच टीमों को कई अहम सुराग मिले हैं। माना जा रहा है कि ये बम पाली में तैयार किए गए, लेकिन इनका बारूद उदयपुर व आसपास के क्षेत्रों से लाया गया। इनमें भरा गया बारूद उस इलाके में माइंस में विस्फोट करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

खुफिया पुलिस को कई अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में इस तरह के और बम मिलने की आशंका है।

इस सूचना के बाद सोजत, कुशालपुरा, जैतारण, पाली, मारवाड़ जंक्शन सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

उदयपुर संदेह के घेरे में क्यों?
यहां मिले बमों को डिफ्यूज करने के दौरान जिन अखबारों में लपेटे हुए डेटोनेटर के टुकड़े और गन पाउडर मिले, वह 17 फरवरी व 13 मार्च 2002 को उदयपुर से प्रकाशित हुआ था। बम बनाने में जिस मोबिल ऑयल के डिब्बे का इस्तेमाल किया गया। उस पर उत्पादन का समय वर्ष 2001-02 अंकित है। उस तरह के ऑयल का उत्पादन छह साल पहले बंद हो गया।

सांप्रदायिक तनाव के समय होना था उपयोग!
सीआईडी पुलिस के अनुसार मारवाड़ जंक्शन के पास मिले बम क्रूड बम हैं। पांच से छह साल पूर्व राज्य के कई इलाकों में हुए सांप्रदायिक तनावों के दौरान ऐसे क्रूड बमों का इस्तेमाल हुआ था। इससे माना जा रहा है कि इन बमों का उपयोग सांप्रदायिक उन्माद के दौरान किया जाना था।

बम निरोधक दस्ते ने बम पांच-छह साल पुराना होना बताया है। इनको संभवत: स्थानीय स्तर पर ही तैयार किया गया। उदयपुर इलाके में खनन में इस तरह के बारूद का इस्तेमाल होता है। और जगह भी इस तरह के बम मिलने की संभावना है। संवेदनशील जगहों पर खास सतर्कता बरती जा रही है।
अमृत कलश, डीआईजी, सीआईडी(सीबी), जयपुर

पाली के पास मिले बम में पाया गया विस्फोटक उदयपुर की माइंस में इस्तेमाल होता है। ऑयल के डिब्बे में मिले सुराग व बम की क्वालिटी भी इस ओर संकेत कर रही है। बेंगलूर व अहमदाबाद बम ब्लास्ट के बाद सख्ती देख संभवत: ये बम किसी ने फेंक दिए।
-राजीव दासोत, आईजी, जोधपुर रेंज





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