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नसबंदी के बाद भी हुई संतान

कोटा. नसबंदी आपरेशन के बाद भी एक महिला को पुत्री होने पर इस महिला ने कलेक्टर, सीएमएचओ एवं महिला नसबंदी शिविर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ 10 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति का एक प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायालय में दाखिल किया है।

न्यायालय ने बजाजखाना रामपुरा निवासी शाहिदा परवीन की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई कर कलेक्टर, सीएमएचओ एवं महिला नसबंदी शिविर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को नोटिस जारी कर उन्हें जवाब-तलब किया है। मामले पर सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

यह कहा प्रार्थना पत्र में
शाहिदा परवीन ने प्रार्थना पत्र में कहा कि सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के लिए नसबंदी शिविर जिला कलेक्टर के माध्यम से आयोजित किए जाते हैं। शिविर में कराए जाने वाले ऑपरेशन निशुल्क होते हैं।उसने दो पुत्रियां पूर्व में पैदा होने से 5 दिसंबर 2003 को सरकार द्वारा आयोजित रामपुरा सेटेलाइट चिकित्सालय में आयोजित शिविर में नसबंदी ऑपरेशन करवाया था।

प्रार्थना पत्र में महिला ने कहा कि नसबंदी ऑपरेशन के बाद लगभग चार वर्ष पश्चात् उसके पेट में दर्द की शिकायत हुई। इस पर उसने 16 अक्टूबर 2007 को स्त्रीरोग विशेषज्ञ लक्ष्मी शर्मा से चैकअप कराया। इस पर स्त्रीरोग विशेषज्ञ लक्ष्मी शर्मा ने उसे यह कहा कि आप 18-20 सप्ताह से गर्भवती है।

उसने दुबारा से चैकअप कराया तब भी वह गर्भवती होना बताया। महिला नसबंदी शिविर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिए गए नसबंदी ऑपरेशन के बाद 20 फरवरी 2008 को दिन के 2 बजकर 40 मिनट पर जेके लॉन अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। उसने कहा कि परिवार में तीन लड़कियां होने पर वह और उसके पति मानसिक व शारीरिक रूप से बीमार रहने लगे हैं।





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