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फिर कुचल गए सुनहरे सपने

कोटा. child आईएल चौराहे पर बुधवार सुबह एक ट्रक ने साइकिल सवार छात्रा को कुचल दिया। जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। बेतरतीब यातायात व्यवस्था से गुस्साएं कांग्रेसियों ने हाइवे पर जाम लगाया। पुलिस ने लाठियां फटकार कर जाम खुलवाया।

विज्ञाननगर पीएंडटी कॉलोनी में रहने वाली 16 वर्षीय हिना पुत्री दुर्गालाल प्रजापति बुधवार को कोचिंग से पढ़कर घर लौट रही थी। जैसे ही हिना साइकिल से आईएल चौराहे से विज्ञाननगर की तरफ जाने लगी तभी झालावाड़ की तरफ से आए एक ट्रक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर लगते ही हिना की साइकिल सड़क से दूसरी तरफ गिरी और वह खुद बीच सड़क पर। ट्रक चालक फिर भी गति पर नियंत्रण नहीं रख सका। हिना संभल पाती, इससे पहले ही ट्रक के पहिए उसके शरीर को रौंद गए।

बिखर गए ख्वाब

ख्वाब था आसमां छूने का, कुछ सपने थे जिन्हें सच कर दिखाना था मगर बदकिस्मती ने सब कुछ छीन लिया। इंजीनियर बनने का सपना संजोए मेधावी हिना की सांसें एक बेकाबू ट्रक ने पल भर में छीन लीं। उसकी मौत की सूचना जैसे ही घरवालों को मिली वे बेसुध हुए व सदमे में डूब गए। काफी देर तक मां और भाई जमीन से नहीं उठे। उनका हाल यह था कि कुछ-कुछ देर में वे बेहोश हो रहे थे। उन्हें इस हाल में देख हर आंख नम हो गई। इस दौरान हिना के परिजन बेहद गमगीन दिखाई दिए।

किसी को विश्वास नहीं हुआ
हिना की मौत पर सहसा किसी को विश्वास न हुआ। जिसे भी पता चला, उनका घर पर आना शुरू हो गया। शव के आने से पहले ही वहां काफी भीड़ जमा हो गई। हर कोई हिना को एक बार देखने को आतुर था। जैसे ही उसका शव घर पहुंचा, कोहराम मच गया।

तीनों भाइयों की लाडली
हिना घर में सबसे छोटी थी और तीन भाइयों में इकलौती व लाड़ली बहन थी। उसके बड़े भाई धर्मराज रावतभाटा आरपीएस में कार्यरत थे। दूसरे भाई पंकज सीए की तैयारी कर रहा था। तीसरा भाई जितेंद्र अभी पढ़ रहा है। हिना स्वभाव से शर्मिली थी। वह हमेशा पढ़ाई में ही व्यस्त रहती थी। सुबह 10 बजे वह घर से बिना खाना खाए ही निकली थी।

कैसे रुकें हादसे

ट्रैफिक पुलिस करे पहल
बच्चे अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन रात एक कर देते हैं। हम भी इसमें उनकी काफी मदद करते हैं। ऐसे हादसों से उनके परिजनों के ख्वाब पल में चकनाचूर हो जाते हैं। ट्रैेफिक पुलिस चाहे तो आसानी से इस समस्या को सुलझा सकती है। वह पब्लिक को अवेयर कर ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू कराएं और शहर में ट्रकों की आवाजाही का समय तय हो।
-डॉ. विजय प्रतिमा मित्तल, एमडी, वीपीएम क्लासेज

सख्त नियम लागू करें
प्रशासन को इस हादसे के बाद कुछ सख्त नियम लागू करने चाहिए। जिस समय कोचिंग के बच्चे आते- जाते हैं, उस दौरान मार्ग पर भारी वाहनों पर रोक लगाएं। कॉमर्स कॉलेज चौराहा, आईएल चौराहा और अंटाघर जैसे भीड़ भरे चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस सतर्क रहे।
-डॉ. राजबाला वशिष्ठ, लेक्चरर, जेडीबी गल्र्स कॉलेज

बाईपास जल्दी बनें
दूर- दूर से माता- पिता अपने लाड़लों को यहां भेजते हैं। हमारे शहर के बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था उनके सपनों को एक पल में तोड़ देती है। जिन बच्चों ने शहर को पहचान दी, उन्हें सुरक्षित रखना हमारा फर्ज बनता हैं। बाईपास बनाने में हो रही देरी से रोज ऐसी प्रतिभाएं दम तोड़ देती हैं।
-हिमानी संतवानी, हाउसवाइफ

जल्द उठाए कदम
शहर में आए दिन एक्सीडेंट होना आम हो गया है। आखिर हम कब तक ये कीमत चुकाते रहेंगे। कोई घटना होने के बाद प्रशासन कुछ दिनों तक सक्रिय रहता है। फिर स्थिति वैसी हो जाती है। ऐसे में उन परिवारों पर क्या बीतती होगी। प्रशासन बाईपास के लिए जल्द ही निर्णय ले।
-अंजू गुप्ता, हाउसवाइफ

राजमार्ग फिर रक्तरंजित
हिना की चीख निकली और उसका शरीर निढाल हो गया। वहां से गुजर रहे कई लोग एक साथ उसकी मदद के लिए दौड़े। कुछ यातायात के जवान हिना को संभालने में लगे, जबकि एक ने ट्रक के चालक को पकड़ लिया।

हिना को तत्काल सामने ही स्थित प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें उखड़ चुकी थीं। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर शव को एमबीएस अस्पताल भेज दिया, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इधर, घटनास्थल पर भीड़ जमा होने लगी तो पुलिस ने तत्काल ट्रक व चालक को थाने भेज दिया।

इंजीनियर बनने की चाहत
घर में पढ़ाई का माहौल होने से हिना भी पढ़कर कुछ करना चाहती थी। उसके बड़े भाई धर्मराज ने राजस्थान में आईटीआई टॉप किया था। इस साल दसवीं में उसके 70 प्रतिशत से अधिक अंक आए थे। उसका शुरू से इंजीनियर बनने का सपना था। इसलिए उसने साइंस मैेथ्स विषय लिए। वह विज्ञान नगर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल की छात्रा थी और मैथ्स की कोचिंग लेने जाती थी।





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