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गाले.भारतीय क्रिकेट टीम के तीन दिग्गज सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली व राहुल द्रविड़ श्रीलंका के खिलाफ लगातार तीन टेस्ट पारियों में असफल रहे हैं।
इन असफलताओं के कारण इन्हें उम्रदराज मान कर टेस्ट टीम से बाहर करने की आवाज बुलंद होने लगी है। क्रिकेट विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि वीरेंद्र सहवाग श्रीलंकाई गेंदबाजों की धुनाई कर सकते हैं तो ये तीनों क्यों नहीं कर सकते हैं।
मास्टर नहीं कर पा रहे हैं ब्लास्ट
सचिन तेंडुलकर कोलंबो टेस्ट में 27,12 और गाले टेस्ट की पहली पारी में पांच रन ही बना सके। श्रीलंका आने से पहले उन्हें ब्रायन लारा के सर्वाधिक रनों के विश्व कीर्तिमान को तोड़ने के लिए 172 रन की आवश्यकता थी, लेकिन वे तीन पारियों में सिर्फ 44 रन ही जोड़ सके हैं। हो सकता है कि सचिन कीर्तिमान रच भी लें, लेकिन यह टेस्ट सीरीज उनके लिए दागदार होगी। सचिन की निरंतर असफलता से भी यह मांग उठने लगी है कि लारा का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद उन्हें भी टेस्ट से संन्यास ले लेना चाहिए।
ढह रही है टीम इंडिया की ‘दीवार’
किसी समय मिस्टर वाल के रूप में प्रसिद्धि पा चुके राहुल द्रविड़ कोलंबो टेस्ट में (14 व 10) तथा गाले टेस्ट में (2) में बेहद खराब खेले। तीनों बार ही उन्हें अजंता मेंडिस ने आउट किया।
द्रविड़ जैसा बल्लेबाज यदि बार-बार किसी नए गेंदबाज से आउट हो रहा है, तो साबित होता है कि उनका आत्मविश्वास डगमगा चुका है। मेंडिस ने तीनों बार उन्हें अपनी कैरम बॉल डिलीवरी का शिकार बनाया। वे उनके सामने जिस तरह से पैड का सहारा ले रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि वे डरे हुए हैं।
लापरवाही बरत रहे हैं गांगुली
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली (0) ने श्रीलंकाई तेज गेंदबाज चामिंडा वास की गेंद पर जिस लापरवाह ढंग से शॉट खेला, वह बेहद चौंकाने वाला था। ऐसे समय जब तीन विकेट कुछ अंतराल में गिर चुके थे, उन्हें शॉट लगाने की आवश्यकता ही नहीं थी।
गांगुली इससे पहले कोलंबो टेस्ट की दोनों पारियों में भी (23 व 4) फ्लॉप रहे थे। गांगुली के बारे में कहा जा रहा है कि वे अपने पिता के इलाज के लिए इंग्लैंड में थे और उन्होंने श्रीलंका आने से पहले ज्यादा अभ्यास नहीं किया था।