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पूर्व क्रिकेटर अशोक मांकड़ का निधन

मुंबई.पूर्व टेस्ट खिलाड़ी अशोक मंकड़ का शुक्रवार को वर्ली स्थित उनके घर में निधन हो गया। 61 वर्षीय मंकड़ मध्य प्रदेश, मुंबई, रेलवे और बड़ौदा रणजी टीम के कोच भी रहे। पूर्व क्रिकेटरों और खेलप्रेमियों ने मंकड़ की मौत पर शोक जताया है।

भारत के महान ऑलराउंडर वीनू मंकड़ के पुत्र अशोक की गिनती भारत के उन प्रतिभाशाली क्रिकेटरों में होती है, जो अपनी प्रतिभा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साबित करने में नाकाम रहे। एक दशक लंबे टेस्ट कैरियर में अशोक के नाम 991 (22 मैच) रन दर्ज हैं। कैरियर के एकमात्र वनडे में उन्होंने 44 रन की पारी खेली थी। प्रथमश्रेणी मैचों में उनके नाम १२,980 (218 मैच) रन दर्ज हैं।

खेल को समर्पित परिवार :-

विरासत में क्रिकेट पाने वाले अशोक का परिवार भी खेलों के प्रति समर्पित है। अशोक ने 60 और 70 के दशक की टेनिस स्टार निरूपमा से शादी की। उनके दोनों बेटे मिहिर और हर्ष भी टेनिस को अपना कैरियर बना चुके हैं।

चमक बरकरार नहीं रख सके अशोक :

- 17 की उम्र में प्रथम श्रेणी का आगाज करने वाले अशोक ने टेस्ट की शुरुआती 9 पारियों में 4 अर्धशतक जमाए। बहरहाल वे इस सफलता को बरकरार नहीं रख सके।

>‘‘मध्यक्रम के जबर्दस्त बल्लेबाज अशोक मंकड़ को टेस्ट स्तर पर पर्याप्त मौका नहीं मिला। ओपनिंग बल्लेबाजी करने के चलते वे अपने प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर सके।’’

(बापू नाडकर्णी, पूर्व टेस्ट क्रिकेटर)

‘‘अशोक मंकड़ को यदि भारतीय टीम में मध्यक्रम में खेलने का मौका मिलता, तो उनका कैरियर और बेहतर होता।’’(अजित वाडेकर, पूर्व कप्तान)

‘‘भारतीय टेस्ट क्रिकेट में अशोक मंकड़ के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।’’

(एमएस. गिल, खेल मंत्री)

‘‘अशोक की मौत से मैं व्यक्तिगत रूप से आहत हूं। उनकी मौत के साथ ही क्रिकेट जगत ने एक अच्छा रणनीतिकार, पथप्रदर्शक, दार्शनिक और मित्र खो दिया है’’

(शरद पवार, बीसीसीआई अध्यक्ष)

‘‘अशोक के निधन से भारतीय क्रिकेट का एक युग समाप्त हो गया है। वे एक शानदार बल्लेबाज, बेहतरीन कप्तान और सबके चहेते इंसान थे।’’

(निरंजन शाह, बीसीसीआई के सचिव)

अधूरी रह गई अशोक की पहचान :

अशोक मंकड़ के निधन ने क्रिकेट जगत में जो शून्य पैदा किया है, वह शायद ही कभी भर पाएगा। भारत के कई महत्वपूर्ण जीत दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

अशोक को १९६९-७क् में न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण का मौका मिला। शुरूआत में तो उन्होंने निचले क्रम पर बल्लेबाजी की लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें ओप¨नग करने भेजा गया। अपनी नई भूमिका में वह जबर्दस्त सफल रहे। उन्होंने इस भूमिका में १९७१ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्रमश: ७४, क्८, ६४, ६८ और ९७ रन बनाए।

वे वेस्टइंडीज और इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम के सदस्य भी थे। इस दौरे में भारतीय टीम अजीत वाडेकर के नेतृत्व में दोनों देशों में श्रंखला जीतने में कामयाब रही थी। वेस्टइंडीज दौरे में अशोक ने सुनील गावसकर के साथ शानदार साझेदारियां की। वे इंग्लैंड दौरे में असफल रहे और उनके टेस्ट कैरियर पर ग्रहण सा लग गया।





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