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अजमेर. नियमों की अनदेखी कर 51 कॉलोनियों के नक्शे पास करने के गड़बड़झाले की तफ्तीश के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो मुख्यालय ने यूआईटी के पूर्व टाउन प्लानर हरनामसिंह आजाद के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
आजाद को कॉलोनाइजर्स से सांठगांठ कर दो करोड़ रुपए से ज्यादा राशि के वारे-न्यारे करने का आरोपी माना गया है।
एसीबी के जयपुर स्थित मुख्यालय को इस मामले में करीब तीन महीने पहले शिकायत मिली थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि पूर्व नगर नियोजक हरनामसिंह आजाद के कार्यकाल में जनवरी 2002 से जुलाई 2004 के बीच स्वीकृत कॉलोनियों के नक्शे नियमों की अनदेखी कर पास किए गए हैं। इससे दो करोड़ रुपए से ज्यादा की काली कमाई की गई है।
मुख्यालय के आदेश से एसपी रुपिन्दरसिंह के निर्देशन में डीएसपी मंसूर अली ने जांच की। जांच में ब्यूरो ने संबंधित पत्रावलियों का अध्ययन किया। कॉलोनियों के नक्शे स्वीकृत करने के लिए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से समय-समय पर जारी परिपत्र और दिशा-निर्देशों का गहन अवलोकन कर कॉलोनियों का मौका-मुआयना भी किया गया।
जांच में पाया गया कि 51 कॉलोनियों के नक्शे नियमविरुद्ध हैं। नियमानुसार कॉलोनियों का चालीस फीसदी इलाका सुविधा क्षेत्र (सड़क, सामुदायिक भवन, गार्डन, नाली, पानी व बिजली ) के लिए छोड़ना जरूरी है, लेकिन आजाद के कार्यकाल में इस नियम की अनदेखी कर नक्शे पास किए गए। नतीजतन कॉलोनाइजर्स ने सुविधा क्षेत्र की जमीन बेच कर दोनों हाथों से चांदी काटी।
एसीबी मुख्यालय ने डीएसपी मंसूर अली की जांच रिपोर्ट के आधार पर आजाद के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण संख्या 186/08 दर्ज किया है। आजाद वर्तमान में बीकानेर में सीनियर टाउन प्लानर के पद पर कार्यरत हैं।
कायदा, एक नजर..
स्वायत्त शासन विभाग ने जनवरी 2002 में नई कॉलोनियों के नक्शे स्वीकृत करने के बारे में स्थानीय निकायों को परिपत्र जारी किया था। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि कॉलोनी की कुल जमीन का 40 प्रतिशत हिस्सा सुविधा क्षेत्र के तौर पर छोड़ा जाना चाहिए,जबकि शेष 60 प्रतिशत जमीन का आवासीय उपयोग होना चाहिए।
गड़बड़झाला..
यूआईटी के पूर्व टाउन प्लानर हरनामसिंह आजाद के कार्यकाल में 60 कॉलोनियों के नक्शे पारित हुए थे। इनमें से 51 कॉलोनियों में सुविधा क्षेत्र घटाकर नक्शे पास किए गए। हालांकि नक्शे पास करने के लिए समिति है, लेकिन समिति को सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों की जानकारी देने की जिम्मेदारी टाउन प्लानर की होती है। आजाद ने समिति को इस नियम से अनभिज्ञ रखा था।
नतीजा..
कॉलोनियों में सुविधा क्षेत्र घटाकर नक्शे पास करने का नतीजा यह रहा कि कॉलोनाइजर्स को लाखों रुपए का लाभ मिला, सुविधा क्षेत्र की जमीन पर प्लाट काट दिए गए, जबकि कॉलोनी में प्लाट खरीदने वाले लोगों को नियमानुसार सुविधा नहीं मिली। एसीबी की जांच में खुलासा हुआ है कि अफसरों ने कॉलोनाइजर्स से मिलीभगत कर दो करोड़ रुपए से ज्यादा राशि के वारे-न्यारे कर दिए।
अब क्या होगा..
डीएसपी मंसूर अली ने बताया कि उन्होंने शिकायत की जांच के बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजी थी। जांच में कॉलोनियों के नक्शे पास करने में गंभीर अनियमितताएं पाई र्गई। इनके लिए यूआईटी के तत्कालीन नगर नियोजक हरनामसिंह आजाद जिम्मेदार पाए गए। अब सबूत जुटाए जाने के बाद अदालत में चार्जशीट पेश की जाएगी।
यहां हुई गड़बड़ी..
एसीबी जांच में सामने आया है कि हरनामसिंह आजाद के कार्यकाल में स्वीकृत कॉलोनियों में कायड़, घूघरा, कोटड़ा, थोक मालियान, बोराज, लोहागल, किरानीपुरा, चौरसियावास सहित कई इलाके शामिल हैं।