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कोटा.गुजरात पुलिस द्वारा गिरफ्तार साजिद मंसूरी पांच साल तक राजस्थान के कोटा में रहा था पर, पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने कभी उसकी निगरानी नहीं रखी। राजस्थान पुलिस ने 2002 से 2006 तक उसके कोटा में रहने की पुष्टि करते हुए चाहे जो दावे किए हों, लेकिन निगरानी के सवाल पर दोनों जिम्मेदारी से बचते हुए एक-दूसरे को दोष दे रहे हैं।
कोटा रेंज के पुलिस महानिदेशक यूआर साहू की शिकायत है कि शहर में सिमी की गतिविधियों के बारे में खुफिया एजेंसी ने कभी कोई सूचना नहीं दी। वहीं, खुफिया सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर सभी जिलों को सिमी की गतिविधियों के बारे में समय-समय पर सूचना दी जाती थी।
नाम न छापने की शर्त पर एक खुफिया अधिकारी ने बताया, ‘केवल धमाकों की जांच के बाद ही मंसूरी की गतिविधियां खुलकर सामने आ पाईं। इसके पहले तक वह कोटा के किसी आम नागरिक की तरह ही रह रहा था।’
कोटा के पुलिस अधीक्षक विशाल बंसल का कहना है कि ‘पुलिस को खुफिया विभाग से कभी सूचना नहीं मिली पर हो सकता है कि खुफिया एजेंसियां उस पर निगाह रख रही हो। ऐसे मामले में बहुत जरूरी होने पर ही पुलिस को सूचना दी जाती है अन्यथा खुफिया एजेंसियां विशेष अभियान दल के मार्फत ही कार्रवाई करती हैं।’