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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट में पुलिस महानिदेशक जेल पीके तिवारी के शपथपत्र देने के बावजूद जोधपुर सेंट्रल जेल में 30 जुलाई तक जैमर नहीं लग पाया, हालांकि जेल में गुरुवार को मेटल डिटेक्टर लगा दिया गया।
डीजीपी जेल तिवारी ने 29 मई को हाईकोर्ट में पेश होकर दिए शपथपत्र में बताया था कि सेंट्रल जेल में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर अवांछित सामग्री की आवाजाही व सुविधाएं उपलब्ध कराने पर अंकुश लगाने के लिए जैमर लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में वहां तैनात होमगार्ड की भूमिका भी संदिग्ध होने की जानकारी मिली है।
जेल स्टाफ की भूमिका सामने आते ही उन पर सख्त कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया गया,मगर होमगार्ड तो सस्पेंड भी नहीं किया जा सकता। यह हमारे ध्यान में है और जल्द कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उन्होने बताया कि पूर्व में भेजे गए प्रस्तावों के आधार जोधपुर व जयपुर सहित चार जेलों में जैमर लगाने के लिए बीस लाख का बजट मिला था,मगर जब जैमर खरीदने की बात आई तो पता लगा है कि एक जैमर की कीमत अठारह लाख रुपए है,इसलिए सबसे पहले जैमर खरीद कर जोधपुर जेल में लगाया जाएगा। इसके लिए सर्वे करने के बाद कंपनी ने तीस जुलाई तक जैमर लगाने का भरोसा दिया है।
तलाशी के लिए हैंड मेटल डिटेक्टर
जोधपुर जेल में मुख्य द्वार पर बंदियों की तलाशी के लिए हैंड मेटल डिटेक्टर आ चुके हैं और पुराने सीसीटीवी को दुरुस्त कर कैदियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। नए सीसीटीवी मंगवाने सहित जेल को हाईटेक बनाने के लिए नए सिरे से प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेज दिया गया है।
जोधपुर की तर्ज पर जयपुर व अजमेर सहित बड़ी जेलों में जैमर व आधुनिक उपकरण लगाने के लिए बीस करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव भी राज्य सरकार को भेज दिया गया है। पुलिस आधुनिकरण योजना के तहत जेलों को आधुनिक बनाने का बजट जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद है।
सेलुलर जैमर का प्रस्ताव भेजा
पुलिस महानिदेशक (जेल) पीके तिवारी ने 28 मई को हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश कर बताया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को सेलुलर जैमर के लिए प्रस्ताव भेजा है। राज्य सरकार ने जैमर लगाने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. को अधिकृत किया है। सेलुलर जैमर एवं डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर के लिए 21 अप्रैल 08 को सरकार से 46 लाख 51 हजार 538 रुपए की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति मांगी है।
महानिदेशक ने बताया कि संबंधित फर्म से प्राप्त डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर का विभागीय निरीक्षण कमेटी के जांच करने पर मापदंडों पर यह खरा नहीं पाया गया, इसलिए अब दुबारा सर्वे होगा। उन्होने 30 जुलाई तक जोधपुर जेल में जैमर लगाने का भरोसा दिलाया था।
कंपनी ने तो जेल में दुबारा सर्वे किया और न ही डीजी के वादे के मुताबिक जैमर लगाया। हालांकि डीजी ने हाईकोर्ट में इस बारे में और समय मांगते हुए जवाब दे दिया है। वहीं जेल में गुरुवार को क्वार्टर गार्ड के पास मैटल डिटेक्टर लगा दिया है। जेल में पुराने सीसीटीवी दुरुस्त कर पूर्व में ही लगा दिया गए हैं।