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Other Sports Other Sports रविवार.देखा गया है कि विश्व कप, एशियाड और ओलिंपिक जैसे बड़े खेल आयोजनों के समय सेक्स वर्करों की मांग मेजबान देश में बढ़ जाती है। कई बार ग्राहकों की बड़ी तादाद को देखकर स्थानीय सेक्स वर्करों के अतिरिक्त दूसरे देशों से भी सेक्स वर्कर आयोजन स्थल के आस-पास जमा होने लगते हैं।
जर्मनी में 2006 में हुए विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट के समय यही नजारा देखने को मिला था। पर, चीन ने ओलिंपिक के दौरान वेश्यावृत्ति पर प्रतिबंध लगा दिया है। वेश्यावृत्ति के अतिरिक्त चीन ने ओलिंपिक के दौरान टी.बी, मानसिक रोग से पीड़ित लोगों और कुष्ठ रोगियों को भी देश में आने से रोक दिया है। गौरतलब है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 1949 में सत्ता में आने के बाद ही पूरे देश में वेश्यावृत्ति पर रोक लगा दी गई थी पर, व्यवहारिक रूप से इसे कभी भी रोका नहीं जा सका। गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार सेक्स के जरिए अपनी आजीविका चलाने वाली महिलाओं की संख्या इस समय चीन में 10 लाख के करीब है और तमाम प्रतिबंधों और जागरूकता अभियान के बावजूद इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
एड्स और यौन रोगों के संबंध में जनता की अनभिज्ञता और 30 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढ़ रहे एड्स रोगियों को देखते हुए ही चीन ने ओलिंपिक के दौरान वेश्यावृत्ति पर रोक लगाई है। ऑस्ट्रेलिया सहित कुछ देशों के खेल संघों ने भी ओलिंपिक के दौरान अपने एथलीटों को सेक्स वर्करों से दूर रहने की सलाह दी है। रोक लगाए जाने के बावजूद आप बीजिंग और दूसरे बड़े शहरों के नाइट क्लबों, मसाज पार्लरों और सैलूनों में वेश्याओं को बड़ी आसानी से पा सकते हैं।
इन दिनों बीजिंग शहर में युवा आकर्षक महिलाएं ग्राहकों के साथ 600 रुपए से लेकर 10 हजार रुपए में रात बिताने के लिए आसानी से मिल जाएंगी।
पुलिस के लिए वेश्यावृत्ति में लिप्त इन महिलाओं को पकड़ना काफी मुश्किल है, क्योंकि ये महिलाएं सामान्य क्लब जाने वाले लड़कियों के समान ही नजर आती हैं। चीन के सेक्स वर्कर ओलिंपिक को कमाई के एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में वेश्यावृत्ति पर लगाया गया प्रतिबंध कितना कारगर रहता है, यह देखने वाली बात होगी।