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Chandigarh Chandigarh हिमाचल. हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित नयना देवी मंदिर में रविवार सुबह पहाड़ी धंसकने की अफवाह के बाद मची भगदड़ में 147 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है।
मृतकों में 39 बच्चे और 45 महिलाएं शामिल हैं। हादसे में 250 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। अनेक लोगों के लापता होने की वजह से मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
मृतकों में से 70 शवों की पहचान कर ली गई है। इनमें से अधिकतर हिमाचल, पंजाब व हरियाणा के निवासी थे। हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने की घोषणा की है। पंजाब सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को इतनी ही राशि का मुआवजा देने का एलान किया है।
पहले उड़ी अफवाह : सावन का नवरात्र मेला होने की वजह से मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। एडीशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट सीपी वर्मा ने बताया कि सुबह लगभग 9:30 बजे पास की पहाड़ी पर भूस्खलन की अफवाह फैलने से श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई।
रेलिंग टूटी : अफवाह के चलते मंदिर की तरफ जा रहे यात्री वापस भागने लगे। भारी धक्का-मुक्की के बीच मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते में बनी एक रेलिंग टूट गई। वर्मा ने बताया कि इसके बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे।
147 शव बरामद : रोपड़ के जिला कलेक्टर बी पुरुषार्था के अनुसार, देर शाम तक 147 शवों को पंजाब में आनंदपुर साहिब के सिविल अस्पताल में लाया जा चुका था। मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि मामूली रूप से घायल श्रद्धालुओं को निकट के अस्पताल में भेजा गया, जबकि गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को आनंदपुर साहिब के अस्पताल भेजा गया है।
बदइंतजामी की हद : प्रशासन ने इस विख्यात शक्तिपीठ में भीड़ के प्रबंधन का कोई इंतजाम नहीं किया था। नयनादेवी मंदिर सरकारी प्रबंधन के तहत आता है। बावजूद इसके हजारों लोगों की भीड़ को व्यवस्थित करने सिर्फ एक पुलिसकर्मी तैनात था। भगदड़ के बाद करीबन दो घंटे तक मंदिर परिसर में हाहाकार मचा रहा। चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में दर्जनों महिलाओं और बच्चों ने दम तोड़ दिया।
बारिश का व्यवधान : घटना के बाद प्रशासन द्वारा शुरू किए गए राहत व बचाव कार्य में बारिश की वजह से बाधा उत्पन्न हुई।
मुआवजा व आर्थिक मदद : हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव पीसी कपूर ने बताया कि मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए, गंभीर रूप से घायल लोगों को 50 हजार व मामूली रूप से घायल लोगों को 25 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी।
परिजनों के प्रति संवेदना : उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, हिमाचल के राज्यपाल प्रभु राव, मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह आदि ने घटना पर दुख प्रकट करते हुए प्रभावित लोगों के परिवारजनों के प्रति संवेदना जताई है।
‘बदइंतजामी बनी हादसे का सबब’
नयनादेवी मंदिर के पुजारी प्रभात चंद्र शर्मा की आंखों देखी
मंदिर में रविवार के हादसे के बाद मंदिर के पुजारी प्रभात चंद शर्मा ने कहा कि वे बचपन से यहां आते रहे हैं, लेकिन रविवार जैसा काला दिन उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।
रास्तों पर पड़ी लाशें और रोते-बिलखते लोगों को देखना काफी दुर्भाग्यपूर्ण था। अगर प्रशासन ने भक्तों की भीड़ के प्रबंधन के लिए सही इंतजाम किए होते तो इतने लोग न मारे जाते। शर्मा के मुताबिक, सुबह लगभग दस बजे के करीब बारिश हो रही थी और घने बादल छाए थे। तभी पहाड़ी धंसकने की अफवाह से भगदड़ मच गई।
इसी दौरान ज्यादातर महिलाएं और बच्चे मारे गए। उन्होंने कहा कि अफवाह को रोका नहीं जा सकता था, लेकिन लोगों को तुरंत मदद देने और कम से कम नुकसान होने को तो सुनिश्चित किया ही जा सकता था। शर्मा ने हैरानी जताई कि इतनी बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ की सुरक्षा के मद्देनजर कोई व्यवस्था नहीं थी। हादसे के वक्त मौजूद स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने मदद की।
प्रशासन पर गुस्सा : शर्मा ने बताया कि श्रावण मेले में भक्तों की संख्या हमेशा ही अधिक रहती है। शनिवार को श्रावण मास का पहला नवरात्र होने की वजह से रात तक लगभग 60 हजार श्रद्धालु दर्शनों के लिए मंदिर के रास्ते पर पहुंच चुके थे। दूसरा दिन रविवार होने के कारण भक्तों की काफी भीड़ थी। ऐसा हर श्रावण मास में होता है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से उचित प्रबंध नहीं थे।
इंतजार कर रहे भक्तों पर मुसीबत : शर्मा ने मंदिर के आसपास की व्यवस्था के बारे में कहा कि मंदिर के मुख्य द्वार तक के रास्ते को आठ भागों में बांटा गया है। हर हिस्से पर तैनात मंदिर के कार्यकर्ता निश्चित संख्या में भक्तों को आगे बढ़ाते हैं। जब अफवाह सुनकर लोगों ने मंदिर से वापस भागना शुरू किया तो रास्ते के विभिन्न हिस्सों में रुके भक्तों पर सबसे ज्यादा मुसीबत आई।
कौलां वाला टोबा में फंसे हजारों
रास्ता बंद हो जाने से हजारों श्रद्धालु नयना देवी से सात किमी. पहले कौलां वाला टोबा में फंस गए हैं। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि यहां रुकें या लौट जाएं। ऐसे ही एक भगत धूरी से गए प्रदीप दास भगरिया हैं। उन्होंने वहां से फोन पर भास्कर को बताया कि वे अपने तीन बच्चों और पत्नी के साथ हर साल की तरह इस बार भी नयना देवी दर्शन के लिए रवाना हुए थे लेकिन नयना देवी में हादसे के बाद यात्रा रुक जाने से हजारों लोगों को कौलां वाला टोबा में ही रोक दिया गया। वे लोग सुबह से ही यहां फंसे हुए हैं।
प्रदीप ने बताया कि हादसे के बारे में किसी के पास पुख्ता जानकारी नहीं है। यहां पर लोगों के रुकने के पुख्ता इंतजाम भी नहीं हैं। प्रदीप ने बताया कि उन्हें एक धर्मशाला की छत पर आराम करने की जगह तो मिल गई है लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश से दिक्कत आ रही है।
लगातार संगत नयना देवी से नीचे ही जा रही है, यहां अब तिल रखने की भी जगह नहीं है। जिसे जहां जगह मिल रही है, कब्जा कर रहा है। कुछ संस्थाओं के लंगर लगातार चल रहे हैं, इससे उन्हें खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं हो रही है। प्रदीप ने बताया कि जो संगत बसों आदि से आई है वह फंसी हुई है क्योंकि वाहनों को रोक दिया गया है।
भगदड़ : कारण कैसे-कैसे
सबसे बड़ा हादसा : 31 अगस्त, 2005 को बगदाद में भगदड़ के कारण 965 मृत, हजारों घायल।
कारण : मानव बम की अफवाह।
रथयात्रा : इस वर्ष जुलाई में पुरी (उड़ीसा) स्थित जगन्नाथ मंदिर के बाहर छह तीर्थयात्रियों की मौत।
कारण : दर्शन के लिए होड़ में धक्का-मुक्की।
वाई- का देवी मंदिर : महाराष्ट्र के इस मंदिर के पास 26 जनवरी 2005 मची भगदड़ में 265 श्रद्धालुओं की मौत।
कारण : सिलेंडर फटना।
पावागढ़ शिखर : गुजरात स्थित इस धर्मस्थल के काली मंदिर में 14 अक्टूबर 2007 में हुई भगदड़ में 11 मृत।
कारण : जेबकतरों द्वारा धक्का-मुक्की और सांप निकलने की अफवाह।
उज्जैन : मध्यप्रदेश इस धार्मिक शहर में 15 जुलाई 1996 को भगदड़, 34 मृत।
कारण : सीढ़ियों पर फिसलन।