इंदौर. ऐतिहासिक पातालपानी-मुख्तयारा बलवाड़ा मीटरगेज रेल लाइन के एक हिस्से को हैरिटेज रेलमार्ग बनाने की ‘भास्कर’ की पहल ने रविवार को एक कदम और बढ़ाया।
पश्चिम रेलवे और पर्यटन विकास निगम के आला अधिकारियों ने स्पेशल ट्रेन से महू-चोरल लाइन का निरीक्षण किया। फिर निगम ने पैकेज टूर बनाने का वादा किया, तो रेलवे को शनिवार-रविवार को स्पेशल ट्रेन चलाने की संभावना दिखी।
निगम के प्रबंध निदेशक अश्विन लोहानी ने निरीक्षण के बाद बताया स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महू-चोरल रेल सेक्शन को निश्चित ही विकसित किया जा सकता है।
पातालपानी-मुख्तयारा बलवाड़ा सेक्शन के बजाय महू-चोरल सेक्शन में पर्यटन की संभावनाएं ज्यादा हैं। इसके लिए निगम पैकेज टूर बनाएगा, जो बहुत महंगे नहीं होंगे। रेलवे महू-कालाकुंड-पातालपानी-चोरल मीटर गेज ट्रैक पर टूरिस्ट ट्रेन या रेल बस चला सकता है। 1874 में बना यह ट्रैक हैरिटेज रेलमार्ग बनने लायक है और महू से चोरल तक करीब 28 किलोमीटर में कई आकर्षण जुटाए जा सकते हैं।
एक दिन का पैकेज
श्री लोहानी ने कहा महू-चोरल ट्रैक के लिए एक दिन का पैकेज टूर बनाएंगे। रेलवे स्पेशल ट्रेन या दो डिब्बों की रेल बस चलाए तो लोग भविष्य में भी ये खूबसूरत वादियां देख सकेंगे। पर्यटक भ्रमण के दौरान बीच-बीच में रुक सकें, इसके लिए अन्य व्यवस्थाएं करना होंगी।
इससे पहले उन्होंने पश्चिम रेलवे के एजीएम आर.एस. चुघ, डीआरएम प्रभातकुमार वाजपेयी, पर्यटन निगम के रीजनल मैनेजर मुकेश कपूर व अन्य अधिकारियों के साथ महू-चोरल ट्रैक देखा। पातलपानी-मुख्तयारा बलवाड़ा रेल सेक्शन बंद होने की ‘भास्कर’ की खबर के बाद दोनों महकमों के अधिकारियों का यह पहला संयुक्त दौरा था। शनिवार को ही रेल राज्यमंत्री नारणभाई जे. राठवा ने भी इसे हैरिटेज रेलमार्ग का दर्जा देने का भरोसा दिलाया था।
एजीएम ने पाई रोप-वे की संभावना
श्री चुघ ने ट्रैक देखकर श्री लोहानी से कहा यहां तीन-चार जगह रोप-वे बन सकते हैं। महू-चोरल के बीच शनिवार-रविवार को स्पेशल ट्रेन भी चलाई जा सकती है।
स्पेशल ट्रेन से गए अधिकारी
रेल और पर्यटन अधिकारी रविवार सुबह 10.30 बजे महू से चोरल तक दो कोच की स्पेशल इंस्पेक्शन ट्रेन से गए और दोपहर एक बजे लौटे। इस दौरान कई जगह ट्रेन रोककर खूबसूरत वादियां देखीं। डीआरएम ने कहा ‘भास्कर’ की खबर के बाद यह संयुक्त दौरा किया है। आगे क्या करना है, एजीएम तय करेंगे। महू-चोरल सेक्शन को टूरिस्ट या हैरिटेज रेलमार्ग के रूप में विकसित करने के लिए अध्ययन करना होगा। यह काम रेलवे राज्य सरकार के सहयोग से ही कर सकता है।