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नियमों की मार, कैसे पकाएं पोषाहार

अजमेर. आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वितरित होने वाला पोषाहार सरकारी नियमों के कारण आंगनबाड़ीकर्मियों के लिए मुसीबत बन गया है। महंगाई से पोषाहार के सरकारी व बाजार भाव में भारी अंतर आ गया है। ऐसे में पोषाहार पकाना व वितरण करना अब टेढ़ी खीर साबित हो रहा है, वहीं भाव में आए अंतर के बावजूद आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार का वितरण अनेक सवाल पैदा करता है।

पोषाहार वितरण की अनिवार्यता के चलते केन्द्रों पर बच्चों की संख्या फर्जी रूप से बढ़ाई जा रही है या पोषाहार की मात्रा कम की जा रही है, यह जांच का विषय है लेकिन दरों में अंतर की जानकारी होने के बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग मौन है। ऐसे में कर्मचारी पशोपेश में हैं।

विभाग ने पोषाहार वितरण कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंप रखा है। इसके तहत सरकार ने पोषाहार की दर 2.48 रुपए प्रति बच्चे के हिसाब से भुगतान करना तय किया है। दलिया व खिचड़ी के लिए चावल की दर 18 रुपए किलोग्राम, मूंग दाल 36 रुपए, तेल 46 रुपए, गेहूं दलिया 18 रुपए व गुड़ 19 रुपए किलो की दर से प्रति बालक की मात्रा निर्धारित की है।

इसके अलावा प्रति बालक 26 पैसे का मार्जिन निर्धारित किया गया है। इसमें आंगनबाड़ीकर्मी को नमक, हल्दी, धनिया, ईंधन, परिवहन व सब्जी खरीदनी होती है, लेकिन वर्तमान में चावल का बाजार भाव 20 रुपए, मूंग दाल 40 रुपए, तेल 76 रुपए, गुड़ 20 व गेंहू दलिया 20 रुपए प्रति किलोग्राम है। ऐसे में प्रति बालक पोषाहार राशि तीन रुपए से अधिक पहुंच जाती है। इन परिस्थितियों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 2.48 रुपए में पोषाहार पकाना संभव नहीं है। हालांकि विभाग के अधिकारी मार्जिन राशि को महंगाई से एडजस्ट करने का हवाला दे रहे हैं।

बाजार दर ज्यादा
महंगाई में पोषाहार की बाजार दर सरकारी दर से अधिक हो गई है। नियमानुसार पोषाहार पकाना संभव नहीं है। आंगनबाड़ीकर्मी जेब का पैसा लगाने को मजबूर हैं।
-निशी जैन, जिलाध्यक्ष, भारतीय आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ

पोषाहार संभव नहीं
आसमान छूती महंगाई में निर्धारित राशि में पोषाहार पकाना संभव नहीं है। भामस बाजार व सरकारी भाव के अंतर को दूर करने की मांग को लेकर शीघ्र कार्यवाही करेगा।
- भोलानाथ आचार्य, प्रदेश मंत्री, भारतीय मजदूर संघ

कुछ नहीं कर सकते
पोषाहार के सरकारी व बाजार भाव में अंतर आ गया है, लेकिन नियमों के आगे हम कुछ नहीं कर सकते। अंतर पाटने का निर्णय सरकार को करना है।
- सुमन टांक, सुपरवाइजर, महिला एवं बाल विकास विभाग





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