HomeNewsNational National

वेदांती को ले डूबी पीएम की प्रशंसा

अमृतसर. पंजाब की सत्ता पर काबिज शिरोमणि अकाली दल (बादल) की विचारधारा के उलट प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अच्छा इंसान कहना अकाल तख्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती को बहुत महंगा पड़ा और न चाहते हुए भी उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

पंथक सूत्रों के अनुसार सोमवार रात को शिरोमणि कमेटी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ के निर्देश पर महासचिव सुखदेव सिंह भौर तथा सदस्य राजिंदर सिंह मेहता जत्थेदार वेदांती के निवास पर पहुंचे ताकि उनका इस्तीफा लेकर अगली सुबह कुरुक्षेत्र में होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में उसे मंजूर कराया जा सके। सूत्रों ने बताया कि वेदांती ने जब आनाकानी की तो भौर ने उन्हें चेतावनी दी कि यदि ऐसा न किया तो उन्हें जबरन पद से हटा दिया जाएगा।

उन पर कई अन्य आरोप भी मढ़ दिए जाएंगे। इसके बाद वेदांती ने इस्तीफा दे दिया।

शिरोमणि कमेटी के सूत्रों के मुताबिक परमाणु करार के मुद्दे पर संसद में यूपीए सरकार द्वारा विश्वास मत हासिल करने से पहले वेदांती द्वारा की गई प्रधानमंत्री की तारीफ से न सिर्फ अकाली दल प्रमुख प्रकाश सिंह बादल उनसे खफा थे, बल्कि सहयोगी दल भाजपा ने भी इस बात पर बादल से नाराजगी जताई थी। वहीं, यह चर्चा भी आम है कि जत्थेदार वेदांती के निजी सहायक पृथीपाल सिंह संधू, जो उनके करीबी रिश्तेदार भी हैं, कांग्रेस के निकट जा रहे थे। इसके अलावा संधू के एसजीपीसी प्रधान मक्कड़ के साथ भी अच्छे संबंध नहीं हैं।

विवादित रहा कार्यकाल :

जत्थेदार वेदांती का आठ साल से ज्यादा का कार्यकाल कई विवादों, आरोपों और दबावों से घिरा रहा। नवंबर 2002 में शिरोमणि कमेटी के वार्षिक चुनाव के मौके पर स्वर्ण मंदिर परिसर में पुलिस प्रवेश को लेकर उन पर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अकाल तख्त पर तलब करने के लिए दबाव डाला गया, लेकिन वे खामोश रहे। वहीं, शिकागो के बाबा दलजीत सिंह के कथित अवैध संबंधों और बाबा धनवंत सिंह द्वारा अपने सेवक की बेटी से बलात्कार के मामले में उन पर दोषियों से पैसे लेने के आरोप लगे।

‘मैं गंदी राजनीति का शिकार हुआ हूं। मैंने अपनी इच्छा से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है।’

- जोगिंदर सिंह वेदांती, जत्थेदार, अकालतख्त

‘वेदांती ने सेहत के कारण इस्तीफा दिया है, जिसका जिक्र उन्होंने अपने इस्तीफे में भी किया है। उन्होंने खुद लिखा है कि वे काफी समय से सेवा निभा रहे हैं और अब वह इस पद से मुक्त होना चाहते हैं। उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था।’

- अवतार सिंह मक्कड़, प्रधान, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी

पहले भी हटाए गए हैं जत्थेदार :

* एसजीपीसी की कार्यकारिणी ने अप्रैल, 2000 में अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी पूर्ण सिंह को एसजीपीसी की तत्कालीन प्रधान बीबी जागीर कौर से टकराव के कारण पद से हटा दिया गया था।

* इससे पहले फरवरी 1998 में भाई रणजीत सिंह को हटाकर ज्ञानी पूरन सिंह को जत्थेदार बनाया गया था।

* 1986 में राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ जत्थेदार दर्शन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: