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पत्नी से ‘बेवफाई’की 37 साल बाद मिली सजा

नई दिल्ली. पत्नी के होते हुए दूसरी शादी करने के जुर्म में कोर्ट ने 78 वर्षीय एक व्यक्ति को एक साल जेल और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि इस कानूनी प्रक्रिया में 37 साल लग गए और न्याय की आस लगाए बैठी पहली पत्नी को तलाक का दंश भी झेलना पड़ा। जगदीश प्रसाद ने 1951 में कैलाशवती से शादी की थी। इस बीच, जगदीश ने हरप्यारी नामक महिला से संबंध बना लिए। कलावती ने 1971 में इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई।

1991 में कैलाशवती और जगदीश में तलाक हो गया। इससे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने जगदीश को दोषी मानते हुए तीन साल की कैद, दो हजार का जुर्माना किया था।

उम्र का लिहाज :

सोमवार को अतिरिक्त सेशन जज एचएस शर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘जगदीश प्रसाद की उम्र, इस मुकदमे की लंबी अवधि और तलाक के बाद प्रसाद व कैलाशवती के बीच मामला समाप्त होने के तथ्य के मद्देनजर, मैं जगदीश प्रसाद की सजा कम कर रहा हूं।’ %

जगदीश की दलील : जगदीश प्रसाद ने कैलाशवती के आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उसके और हरप्यारी (अब जीवित नहीं) का विवाह वैधानिक नहीं है। कोर्ट ने उसकी दलील यह कहते हुए ठुकरा दी कि मतदाता सूची में उसका नाम हरप्यारी के पति के तौर पर दर्ज था।

कितनी हो सकती थी सजा :

भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत पहली पत्नी या पति के जीवित रहते दूसरी शादी करना अपराध है, जिसकी सजा सात साल तक की कैद और जुर्माना है।





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